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    वैशाख संकष्टी चतुर्थी कब है? सुबह में लगेगी भद्रा, चंद्रमा को अर्घ्य देना जरूरी, जानें तारीख, मुहूर्त

    वैशाख संकष्टी चतुर्थी का व्रत वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इसे विकट संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं. यह अप्रैल की संकष्टी चतुर्थी है. इसमें व्रत रखकर विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा करते हैं, रात के समय में चंद्रमा की पूजा करते हैं और अर्घ्य देते हैं. इसके बाद ही व्रत पूरा होता है. इस बार विकट संकष्टी चतुर्थी पर भद्रा का साया है. आइए जानते हैं कि वैशाख संकष्टी चतुर्थी कब है? वैशाख संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त, चंद्रोदय समय क्या है?

    वैशाख संकष्टी चतुर्थी 2026 तारीख
    पंचांग से देखा जाए तो इस साल वैशाख कृष्ण चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल रविवार को दिन में 11 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 6 अप्रैल को दोपहर में 2 बजकर 10 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर वैशाख संकष्टी चतुर्थी या विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल को है.
    वज्र योग और विशाखा नक्षत्र में वैशाख संकष्टी चतुर्थी
    इस साल की वैशाख संकष्टी चतुर्थी वज्र योग और विशाखा नक्षत्र में है. वज्र योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 02 बजकर 44 मिनट तक है, उसके बाद से सिद्धि योग बनेगा. चतुर्थी पर विशाखा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर देर रात 12:08 ए एम तक है, उसके बाद से अनुराधा नक्षत्र है.

    वैशाख संकष्टी चतुर्थी 2026 मुहूर्त
    5 अप्रैल को वैशाख संकष्टी चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक है. इस समय में लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 09:15 ए एम से 10:50 ए एम तक है, वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 10:50 ए एम से दोपहर 12:24 पी एम तक है. इस समय में विधि विधान से गणेश जी की पूजा करें.

    वैशाख संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:35 ए एम से 05:21 ए एम तक रहेगा, वहीं दिन का शुभ मुहूर्त यानि अभिजीत मुहूर्त 11:59 ए एम से दोपहर 12:49 पी एम तक है.
    वैशाख संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय
    संकष्टी चतुर्थी का व्रत बिना चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य के पूरा नहीं होता है. इस दिन चंद्रोदय की प्रतीक्षा की जाती है क्योंकि चंद्रमा देर से निकलता है. वैशाख संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय रात को 9 बजकर 58 मिनट पर होगा.
    वैशाख संकष्टी चतुर्थी 2026 भद्रा काल
    इस व्रत के दिन सुबह में भद्रा लग रही है. भद्रा सुबह में 06 बजकर 07 मिनट से शुरू होगी और दिन में 11 बजकर 59 ए एम तक रहेगी. इस भद्रा का वास पाताल लोक में है. ऐसे में चतुर्थी पूजा पर कोई प्रभाव नहीं होगा. इस दिन का राहुकाल शाम को 05 बजकर 07 मिनट से शाम 06 बजकर 41 मिनट तक है.

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