पटना। बिहार की राजनीति (Politics of Bihar) में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) के संभावित इस्तीफे को लेकर अटकलें जारी हैं। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) को उम्मीद थी कि 26 मार्च को उनकी “समृद्धि यात्रा” समाप्त होने के बाद वह पद छोड़ देंगे, लेकिन जनता दल (यूनाइटेड) (Janata Dal (United) ने इस प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जेडीयू इस समय को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी के चयन में उसे पूरी तरह विश्वास में लिया जाए। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि वह भाजपा द्वारा मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह अचानक किसी कम चर्चित नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने जैसे प्रयोग नहीं चाहती है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार प्रभारी विनोद तावड़े पटना में मौजूद हैं और राज्य के नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। इसे सत्ता परिवर्तन की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संसद के उच्च सदन यानी कि राज्यसभा के लिए निर्वाचित होता है तो उसे 14 दिनों के भीतर राज्य विधानसभा की सदस्यता छोड़नी होती है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उसकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है।
नीतीश कब तक देंगे इस्तीफा?
बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिया है कि नीतीश कुमार 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नीतीश कुमार के करीबी संजय झा ने कहा है कि 14 दिन के नियम का पूरी तरह पालन किया जाएगा। नीतीश कुमार के 13 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने की संभावना है।
कौन होगा नीतीश का उत्तराधिकारी?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद के उत्तराधिकारी को लेकर बीजेपी में कई नामों पर चर्चा हो रही है, लेकिन जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि अगला मुख्यमंत्री वही होना चाहिए, जो नीतीश कुमार की पसंद का हो। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि नया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए और उनकी राजनीति की शैली को बनाए रखना जरूरी है।
जेडीयू ने भाजपा के सामने रखी शर्तें
जेडीयू ने यह भी जोर दिया है कि सरकार की सामाजिक संरचना में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। साथ ही पार्टी चाहती है कि नया नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी विश्वास में लेकर चले, जो अब राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि बिहार की राजनीतिक परिस्थिति मध्य प्रदेश या राजस्थान से अलग है, जहां बीजेपी ने अचानक मुख्यमंत्री के नाम घोषित कर सभी को चौंका दिया था। बिहार में समाजवादी विचारधारा की गहरी जड़ें हैं और एनडीए के सहयोगी दलों को भी पूरी तरह विश्वास में लेना जरूरी है।


