अलवर: सरिस्का में अब तो बाघों का भी लग चुका अर्धशतक
विजय यादव, मिशनसच ,अलवर। राजस्थान का सरिस्का टाइगर रिजर्व आज भी पर्यटन के नक्शे पर वह स्थान हासिल नहीं कर पाया है, जिसका वह हकदार है। हैरानी की बात यह है कि जिस अलवर जिले में यह अभयारण्य स्थित है, वहीं अलवर के सांसद भूपेंद्र यादव व शहर विधायक संजय शर्मा केंद्र व राज्य में पर्यावरण से जुड़े प्रभावशाली मंत्री हैं। इसके बावजूद पर्यटन मानचित्र पर सरिस्का की ख्याति रणथंभौर की तुलना में दोयम दर्जे की रही है। यह स्थिति तो तब है जब सरिस्का में बाघों का अर्धशतक भी लग चुका है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं और प्रभावी प्रचार-प्रसार के अभाव में सरिस्का अब भी रणथंभौर टाइगर रिजर्व से पिछड़ रहा है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व राजधानी दिल्ली और जयपुर के मध्य स्थित है। वहीं दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस वे से सीधी कनेक्टिविटी के चलते पर्यटकों की सीधी एप्रोच में है, इसके बाद भी सरिस्का में हर साल औसतन 50 से 60 हजार पर्यटक ही सफारी के लिए पहुंच पाते हैं। वहीं, रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की एप्रोच दिल्ली व जयपुर से सीधी नहीं होने के बाद भी हर साल रणथंभौर में औसतन डेढ़ लाख से ज्यादा पर्यटक घूमने पहुंचते हैं। इसका बड़ा कारण पर्यटन मानचित्र पर रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की तुलना में सरिस्का अपनी ख्याति बना पाने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका है।
इसलिए सरिस्का की ख्याति पर लग रहा धब्बा
रणथम्भौर में बाघों की साइटिंग आसानी से होने से वहां ज्यादा संख्या में पर्यटक पहुंचते रहे हैं। रणथम्भौर में बाघों की साइटिंग ज्यादा होने का कारण पर्यटकों को घूमने के लिए ज्यादा अवसर होना है। रणथंभोर में सफारी के लिए 10 रूट हैं और बाघों की संख्या 75 से ज्यादा है। इस कारण पर्यटकों को सफारी के दौरान हर रूट पर बाघ दिख जाते हैं। इसकी तुलना में सरिस्का में सफारी के लिए मात्र पांच रूट हैं, जिसमे बफर रेंज के दो रूट भी शामिल हैं। इसके अलावा सरिस्का के कोर एरिया में तीन रूट हैं, इनमें एक सफारी रूट ऐतिहासिक पांडुपोल हनुमान मंदिर मार्ग है, जिस पर मानवीय दखल ज्यादा रहने से बाघों की साइटिंग के अवसर कम ही मिल पाते हैं। सरिस्का में अभी बाघों की संख्या 52 है और इनमें करीब एक तिहाई शावक हैं, जो बाघिन के साथ ही रहते हैं।

सरिस्का में बाघों के लिए कोरिडोर कम
रणथम्भौर और सरिस्का टाइगर रिजर्व अरावली की पवर्तमाला के बीच स्थित हैं। रणथम्भौर करौली, कैलादेवी एवं रामगढ़ विषधारी अभयारण्य से जुड़ा होने के कारण यहां बाघों को विचरण के लिए बड़ा कोरिडोर मिल जाता है, जबकि सरिस्का में बड़े कोरिडोर की कमी है। पूर्व में सरिस्का व रणथम्भौर दोनों पार्क आपस में जुड़े होने से बाघों के लिए बड़ा कोरिडोर मिल जाता था, लेकिन अब बीच में आबादी बस जाने से यह संभव नहीं रहा।

अब सरिस्का में बाघों का लग चुका अर्धशतक
सरिस्का टाइगर रिजर्व बाघों के प्रजनन के मामले में अव्वल रहा है, यहां बाघों का कुनबा बढ़कर 52 तक पहुंच चुका है। हालांकि यही सरिस्का वर्ष 2005 में बाघ विहिन होने का दंश झेल चुका है, लेकिन वर्ष 2007— 08 में बाघों के पुनर्वास का सिलसिला शुरू होने के बाद सरिस्का ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, जिसका नतीजा रहा है वर्तमान में सरिस्का में बाघों का अर्धशतक लग चुका है। हालांकि रणथंभौर में बाघों की संख्या 75 से ज्यादा बताई जाती है। इसके बाद भी सरिस्का बाघों की संख्या के मामले में रणथंभोर से ज्यादा पीछे नहीं है, लेकिन विश्व पर्यटन मानचित्र पर ख्याति के मामले में रणथंभोर से बहुत पीछे दिखाई पड़ता है।

बुनियादी सुविधाओं में पिछ़डा सरिस्का
विश्व पर्यटन मानचित्र पर सरिस्का के पिछड़ने का बड़ा कारण यहां पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी है। सरिस्का के आसपास पर्यटकों के ठहरने की पर्याप्त सुविधा नहीं होने से ज्यादातर पर्यटक रणथंभौर को प्राथमिकता देते हैं। इसका कारण है कि रणथंभौर पर्यटकों को बुनियादी सुविधाओं के मामले में काफी आगे है। इसके अलावा सरिस्का में सफारी के लिए सीमित रूट होना, ऑनलाइन बुकिंग और गाइडेंस सिस्टम में खामियां, होटल और बुनियादी सुविधाओं का अभाव, खराब सड़क और कनेक्टिविटी पर्यटकों की सरिस्का पहुंच में बाधा बन रही है। जबकि रप्रचार-प्रसार, ब्रांडिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगातार सुधार के मामले में रणथंभोर शुरू से आगे रहा है।
सरिस्का को आगे लाने के लिए यह जरूरी
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सरिस्का को रणथंभोर के बराबर लाने के लिए सरिस्का में सफारी रूट और जोन की संख्या बढ़ाने, टाइगर ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने, पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग करने, बेहतर सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी की आवश्यकता है।
पर्यटन आय में सरिस्का पीछे
वर्ष रणथंभोर में आय सरिस्का में आय सरिस्का में पर्यटक
2017— 18 36 करोड़ 1.39 करोड़ 50265
2018— 19 36 करोड़ 1.42 करोड़ 47933
2019— 20 38 करोड़ 1.54 करोड़ 44828
2020— 21 39 करोड़ 54 लाख 40575
2021— 22 40 करोड़ 2.18 करोड़ 51069
2022— 23 46 करोड़ 2.25 करोड़ 56183
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