ईरान संकट का असर: भारतीय मेडिकल छात्रों का भविष्य अधर में, सरकार से हस्तक्षेप की मांग
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासकर ईरान और इज़राइल के बीच हालात का सीधा असर भारतीय छात्रों पर पड़ रहा है। करीब 3000 भारतीय छात्र, जो मेडिकल की पढ़ाई के लिए ईरान गए थे, अब अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं।
बार-बार बाधित हो रही पढ़ाई
छात्रों के अनुसार, पिछले एक साल में उनकी पढ़ाई तीन बार प्रभावित हो चुकी है। युद्ध और अस्थिर हालात के कारण न तो नियमित कक्षाएं चल पा रही हैं और न ही परीक्षाएं हो पा रही हैं। ऐसे में छात्रों को अपनी डिग्री पूरी होने को लेकर गंभीर चिंता सता रही है।
“हालात बेहद खराब” – छात्र
फैजान नबी, जो केरामन चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं, ने बताया कि युद्ध के बाद हालात काफी खराब हो गए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सीजफायर की बात हुई हो, लेकिन छात्रों का भरोसा अब कमजोर पड़ चुका है। जून 2025 से अब तक तीन बार पढ़ाई बाधित होना उनके भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
एडवाइजरी के बाद लौटे छात्र
फरवरी में भारत सरकार की एडवाइजरी जारी होने के बाद कई छात्र अपनी परीक्षाएं छोड़कर भारत लौट आए थे। अप्रैल में नया सेमेस्टर शुरू होना था, लेकिन अब तक न तो परीक्षाएं हो पाई हैं और न ही कक्षाएं नियमित रूप से शुरू हो सकी हैं। पहले इंटरनेट के माध्यम से छात्र ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रहे थे, लेकिन अब इंटरनेट सेवाएं बंद होने से वह विकल्प भी खत्म हो गया है।
सीजफायर के बावजूद डर का माहौल
नासिर खुएहामी, राष्ट्रीय संयोजक, जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने बताया कि मौजूदा हालात में अभिभावक अपने बच्चों को दोबारा ईरान भेजने से डर रहे हैं। उनका कहना है कि सीजफायर के बावजूद स्थिति कब बिगड़ जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
छात्रों ने भारत सरकार से मांग की है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और उन्हें किसी अन्य देश में अपनी मेडिकल पढ़ाई पूरी करने की व्यवस्था कराई जाए।
उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो हजारों छात्रों का करियर प्रभावित हो सकता है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


