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    Homeदेशश्रवण कुमार का बयान- नीतीश कुमार पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के पक्षधर

    श्रवण कुमार का बयान- नीतीश कुमार पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के पक्षधर

    बिहार|बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को दिल्ली में राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद, उसी शाम वे विशेष विमान से पटना लौट आए। अब बिहार में नई सरकार के गठन की आगे की प्रक्रिया शुरू होनी है, जिसका सीधा मतलब है कि नीतीश कुमार को अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। हालांकि, उनका इस्तीफा कब होगा और नई सरकार का स्वरूप क्या होगा, यह सवाल इस वक्त बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर उत्सुकता है कि आखिर अगला कदम क्या होगा।

    इस संबंध में आज, शनिवार को जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) कोटे के मंत्री श्रवण कुमार ने एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान साफ तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा नियम-कानून और संविधान पर चलने वाले व्यक्ति हैं। जो भी नियम और संवैधानिक प्रक्रिया होगी, नीतीश कुमार उसी का पूरी तरह से पालन करेंगे और उसी के अनुसार आगे बढ़ेंगे। श्रवण कुमार का यह बयान तब आया जब पत्रकारों ने उनसे नीतीश कुमार के इस्तीफे की तारीख और नई सरकार के गठन से जुड़े सवाल किए थे।

    दरअसल, पत्रकारों ने मंत्री श्रवण कुमार से एक दिन पहले, यानी बीते शुक्रवार को विजय कुमार चौधरी के दिल्ली से पटना लौटने पर दिए गए बयान का हवाला दिया था। विजय कुमार चौधरी ने उस वक्त मीडिया से बात करते हुए कहा था कि केवल शपथ लेने से सरकार नहीं बनती है, इसके लिए मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि अभी इस प्रक्रिया के लिए इंतजार करना होगा, जिससे यह साफ संकेत मिला था कि इस्तीफा तुरंत नहीं होने वाला है।

    श्रवण कुमार ने भारतीय संविधान और कानून का किया उल्लेख

    श्रवण कुमार ने अपने साथी मंत्री विजय कुमार चौधरी की बात का पूरी तरह से समर्थन किया। उन्होंने कहा, “विजय कुमार चौधरी ने बिल्कुल सही बात कही है।” श्रवण कुमार ने आगे संविधान के एक अहम प्रावधान का जिक्र करते हुए समझाया कि भारतीय कानून और संविधान में यह स्पष्ट नियम है कि कोई भी व्यक्ति जो प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के उच्च पद पर है, वह बिना किसी सदन (जैसे विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य रहे भी छह महीने तक अपने पद पर बना रह सकता है। इस अवधि में उसे अनिवार्य रूप से किसी सदन का सदस्य बनना होता है, अन्यथा उसे पद छोड़ना पड़ता है।

    संविधान के जानकारों के मुताबिक, यह प्रावधान किसी भी जनप्रतिनिधि को, जो मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के पद पर है, यह अनुमति देता है कि वह किसी भी सदन का सदस्य न होने के बावजूद छह महीने तक उस पद पर बना रह सकता है। इस अवधि में उसे किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद, या संसद के दोनों सदनों में से कोई एक) का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है, तो उसे पद छोड़ना पड़ता है। श्रवण कुमार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा की सदस्यता ली है, और मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफे की अटकलें तेज हैं। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि नीतीश कुमार संभावित रूप से इस संवैधानिक प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए कुछ समय तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।

    क्या एनडीए में फंसा है पेच? टली बैठक और सस्पेंस

    मंत्री श्रवण कुमार के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं, या फिर वे अभी कुछ समय और इस पद पर बने रहना चाहते हैं? उनके बयान को सीधे तौर पर इस्तीफे में देरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। यह सवाल तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर किसी तरह के अंदरूनी पेच की आशंका जताई जा रही है।

    इस आशंका को तब और बल मिला जब बीते शुक्रवार को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कोर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक होनी थी। इस बैठक में बिहार के कई वरिष्ठ बीजेपी नेता, जिनमें उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष जैसे प्रमुख चेहरे शामिल थे, भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। हालांकि, यह बैठक अचानक और बिना किसी पूर्व सूचना के टाल दी गई। इस संबंध में बीजेपी या एनडीए के किसी भी शीर्ष नेता की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया कि बैठक क्यों टाली गई या अब कब होगी।

    क्या NDA गठबंधन में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आमतौर पर ऐसी महत्वपूर्ण बैठकें बिना किसी ठोस और सार्वजनिक कारण के नहीं टाली जातीं, और अगर ऐसा होता है तो उसकी वजह सार्वजनिक की जाती है। इस चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को हवा दे दी है कि गठबंधन में मुख्यमंत्री पद को लेकर या शक्ति संतुलन को लेकर कोई अंदरूनी खींचतान चल रही है। संभवतः यही कारण है कि नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में विलंब हो रहा है, और यही वजह है कि जेडीयू के नेता संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दे रहे हैं।

    हालांकि, इन सब राजनीतिक अटकलों और बयानों के बीच, एक ठोस और प्रत्यक्ष बदलाव भी सामने आया है। मुख्यमंत्री आवास से नीतीश कुमार का निजी सामान शिफ्ट किया जाने लगा है। शनिवार को इससे जुड़ी कुछ तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें देखा जा सकता है कि एक अणे मार्ग, जो मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास है, वहां से ट्रैक्टर के जरिए नीतीश कुमार का निजी सामान पटना के सात नंबर बंगले में शिफ्ट किया जा रहा है। यह फिजिकल शिफ्टिंग इस बात का एक स्पष्ट संकेत है कि राजनीतिक फैसले भले ही लंबित हों और उन पर चर्चा जारी हो, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर नीतीश कुमार बदलाव के लिए तैयार हैं और उन्होंने अपने अगले कदम की तैयारी शुरू कर दी है।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक बयान और स्पष्टीकरण सामने आ सकते हैं। बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ इस पूरी स्थिति को बारीकी से देख रहे हैं कि आखिर नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं और बिहार में नई सरकार का स्वरूप क्या होगा। क्या एनडीए के भीतर चल रही चर्चाएं जल्द किसी नतीजे पर पहुंचेंगी या फिर संवैधानिक छह महीने की अवधि का इस्तेमाल किया जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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