नोएडा, गुरुग्राम समेत एनसीआर में ठेका श्रमिकों का आंदोलन तेज। किसान सभा और SKM का समर्थन, 466 गिरफ्तारियों पर विरोध, न्यूनतम वेतन और श्रमिक अधिकारों की मांग तेज।
जयपुर। एनसीआर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में ठेका श्रमिकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस बीच अखिल भारतीय किसान सभा और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) राजस्थान ने श्रमिकों के इस संघर्ष को खुला समर्थन देते हुए इसे न्यूनतम वेतन, बेहतर कार्य परिस्थितियों और सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई बताया है।
किसान संगठनों ने कहा कि यह आंदोलन 9 अप्रैल को नोएडा फेज-II से शुरू होकर अब गुरुग्राम, मानेसर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल चुका है। केवल नोएडा में ही लगभग 40 से 50 हजार श्रमिक इस आंदोलन में शामिल हैं, जबकि यह विरोध एनसीआर के 6 से 8 प्रमुख औद्योगिक क्लस्टरों और 15 से अधिक क्षेत्रों तक फैल चुका है।
इस व्यापक आंदोलन ने सरकार पर दबाव बनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को वेतन संशोधन की घोषणा करने के लिए मजबूर किया, हालांकि श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह संशोधन न तो पर्याप्त है और न ही स्वीकार्य।
किसान सभा और एसकेएम ने कहा कि यह संघर्ष केवल एनसीआर तक सीमित नहीं है, बल्कि पानीपत, सोनीपत, भिवाड़ी, नीमराना, सूरत, हजीरा और बरौनी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी श्रमिक ठेका प्रणाली, कम वेतन और खराब कार्य परिस्थितियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
संगठनों ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें कॉर्पोरेट दबाव में श्रमिक विरोधी नीतियां लागू कर रही हैं, जिसके कारण देशभर में असंतोष बढ़ रहा है। यह आंदोलन 12 फरवरी की ऐतिहासिक आम हड़ताल की निरंतरता बताया जा रहा है।
इधर, किसान संगठनों ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों पर श्रमिकों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। 16 अप्रैल 2026 तक नोएडा और गुरुग्राम में कुल 466 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
संगठनों का कहना है कि श्रमिकों की मांगों को सुनने के बजाय सरकारें पुलिस का इस्तेमाल कर रही हैं, झूठे मुकदमे दर्ज कर रही हैं और श्रमिक नेताओं को नजरबंद किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
वहीं, महंगाई को भी इस आंदोलन का एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी सिलेंडर की कीमतें काले बाजार में ₹400 से ₹600 तक पहुंच गई हैं, जबकि खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे खासकर प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और भी कठिन हो गई है।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आंदोलन को बाहरी तत्वों द्वारा भड़काया गया बताया है। वहीं राज्य के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने भी इसे साजिश करार देते हुए श्रमिक नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
किसान संगठनों ने इन बयानों को श्रमिकों और किसानों की समस्याओं से ध्यान भटकाने वाला बताया है और कहा है कि यह सरकार की कमजोर समझ को दर्शाता है।
अखिल भारतीय किसान सभा और एसकेएम ने सरकार से मांग की है कि सभी गिरफ्तार श्रमिकों को तुरंत रिहा किया जाए, उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं और श्रमिक संगठनों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता शुरू की जाए।
इसके अलावा संगठनों ने ₹26,000 न्यूनतम वेतन, 8 घंटे कार्य दिवस, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, कार्यस्थल सुरक्षा, ठेका श्रमिकों को समान अधिकार और ठेका श्रम प्रणाली समाप्त कर नियमित रोजगार देने की मांग रखी है।
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो किसान संगठन भी मजदूरों के समर्थन में बड़े आंदोलन के लिए मैदान में उतरेंगे।
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