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    Homeराज्यमध्यप्रदेशरीवा में इंदौर जैसा जल संकट? बोरवेल से गंदा पानी, महापौर भड़के

    रीवा में इंदौर जैसा जल संकट? बोरवेल से गंदा पानी, महापौर भड़के

    रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा शहर में इन दिनों लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, और जो पानी मिल रहा है वह पीने लायक तो दूर, छूने लायक भी नहीं है। शहर के वार्ड क्रमांक 16 सहित कई इलाकों में बोरवेल से निकलने वाले दूषित पानी ने महामारी का डर पैदा कर दिया है। हालात इतने बदतर हैं कि लोग अब घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

    महामारी की आहट: 20 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती

    इलाके के आधा दर्जन से अधिक बोरिंग पंपों से गंदा और बदबूदार पानी निकल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी की दुर्गंध इतनी तेज है कि घरों में सांस लेना भी दूभर हो गया है। अब तक 20 से ज्यादा लोग इस प्रदूषित पानी के सेवन से बीमार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। खौफ का आलम यह है कि कई किराएदारों ने संक्रमण के डर से मोहल्ला ही छोड़ दिया है।

    इंदौर की घटना से सहमे लोग

    रीवा के लोगों के मन में इंदौर के भागीरथपुरा की वह खौफनाक यादें ताजा हो गई हैं, जहां कुछ महीने पहले दूषित पानी पीने से 32 लोगों की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों को डर है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो रीवा में भी कोई बड़ी त्रासदी हो सकती है।

    सीवर लाइन प्रोजेक्ट पर उठे सवाल

    शहर में चल रही 182 करोड़ रुपये की सीवर लाइन योजना अब विवादों के घेरे में है। खुद महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' ने इस योजना की सफलता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

    • लागत: ₹182 करोड़

    • काम पूरा: लगभग 90% (₹165 करोड़ से अधिक खर्च)

    • विफलता: सीवर का पानी पेयजल स्रोतों (बोरवेल) में मिलने की आशंका।

    एक्शन में महापौर: "इंदौर जैसा हादसा नहीं होने दूंगा"

    मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर अजय मिश्रा ने कड़े तेवर अपनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी नागरिक को गंदे पानी की भेंट नहीं चढ़ने देंगे।

    "मैंने सरकार से गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए 20 करोड़ रुपये मांगे थे, जो मंजूर हो गए हैं। वार्ड 16 की शिकायत मिलते ही तत्काल सीवर लाइन कनेक्शन कटवा दिए गए हैं। नगर निगम और संबंधित कंपनी की टीमें मौके पर तैनात हैं।" — अजय मिश्रा 'बाबा', महापौर

    बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?

    नगर निगम की टीमें स्थिति पर नजर तो बनाए हुए हैं, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को साफ पानी न मिलना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते स्थिति पर काबू नहीं पाया गया, तो बीमारी फैलने की जिम्मेदारी किस विभाग की होगी?

     

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