मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो और सोशल मीडिया पोस्ट से उपजे हालिया विवादों पर बेहद नपा-तुला और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अधिकार प्राप्त है, मगर इस स्वतंत्रता की आड़ में किसी अन्य व्यक्ति के आत्मसम्मान और गरिमा को चोट पहुंचाने की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। एक कार्यक्रम के दौरान जब मुख्यमंत्री से स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रनीत मोरे से जुड़े विवाद को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी हास्य-व्यंग्य के कार्यक्रमों के शौकीन हैं और मनोरंजन के इस तरीके को सराहते हैं, लेकिन यह बेहद जरूरी है कि इस कला का प्रदर्शन एक मर्यादित दायरे के भीतर रहकर ही किया जाए।
हास्य कार्यक्रम पर मुकदमा दर्ज, पुलिस ने कसी कमर
मुख्यमंत्री ने अपने बयान को और स्पष्ट करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि इसे किसी भी तरह का मनमाना लाइसेंस मान लिया जाए। किसी एक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहीं तक सीमित रहनी चाहिए जहां से दूसरे व्यक्ति के मान-सम्मान के अधिकार का हनन न हो। इस बीच, इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रनीत मोरे, वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा दर्ज कर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इन सभी पर यह आरोप है कि एक लाइव कॉमेडी शो के दौरान कुछ ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जो महिलाओं के प्रति जबरन और उनकी मर्जी के खिलाफ किए जाने वाले अनुचित व्यवहार को बढ़ावा देती हैं।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में बढ़ीं मुश्किलें
इसी दौरान, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रसाद वेदपाठक से जुड़ा एक और नया विवाद तूल पकड़ता जा रहा है, जिन पर एक खास वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का संगीन आरोप लगा है। इस मामले में भाजपा कॉरपोरेटर प्रवीण छेड़ा ने जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर स्थानीय पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वेदपाठक ने एक रिहायशी सोसायटी के भीतर जैन मुनियों के आवागमन की सुविधा के लिए सड़क पर बनाए गए सफेद रंग के विशेष चिन्हों को लेकर बेहद अमर्यादित टिप्पणी की और इसके लिए “जैन जिहाद” जैसे विवादित शब्द का प्रयोग किया, जो सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला है।
अकाउंट हुआ सस्पेंड, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस तीखे विरोध और विवाद के गहराने के बाद संबंधित इन्फ्लुएंसर का इंस्टाग्राम अकाउंट प्रशासनिक तौर पर सस्पेंड कर दिया गया है। दूसरी ओर, वेदपाठक ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी बात रखते हुए एक पोस्ट साझा की है। उन्होंने अपने तर्क में कहा कि किसी भी समुदाय विशेष के नाम पर सार्वजनिक या साझा स्थानों का वर्गीकरण करना सामाजिक ताने-बाने की एकता के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। उनका मानना है कि जो स्थान सबके उपयोग के लिए हैं, उनकी पहचान भी सभी नागरिकों के लिए एक समान होनी चाहिए और उन्हें किसी एक संप्रदाय के प्रतीकों के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल, इन दोनों ही संवेदनशील मामलों में पुलिस और स्थानीय प्रशासन कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं।


