पावन सागर का प्रवचन के दौरान निन्दा से दूर रहने का आह्वान, जीवन को पवित्र बनाने पर जोर
अलवर। जंगल वाले बाबा दिगम्बर जैन संत मुनि पावन सागर महाराज ने कहा है कि यदि जीवन को साफ-सुथरा और पवित्र बनाना है तो व्यक्ति को निन्दा करने और निन्दा सुनने से बचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह न तो किसी की निन्दा करेगा और न ही किसी की निन्दा सुनेगा।
मुनि पावन सागर महाराज स्थानीय स्कीम नंबर-10 स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन चौबीसी मंदिर में अपने मंगल प्रवचन दे रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने ध्यानपूर्वक उनके विचारों को सुना।
उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि निन्दा करने और सुनने का प्रभाव जीवन पर बहुत गहरा पड़ता है। इसे उन्होंने किसान के उदाहरण से समझाते हुए कहा कि जैसे एक किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को किसी आपदा में खो देता है, उसी प्रकार व्यक्ति अपने संचित पुण्य को निन्दा के कारण क्षणभर में खो सकता है।
मुनि श्री ने कहा कि चाहे व्यक्ति ने जीवन में कितना भी पुण्य अर्जित किया हो, लेकिन यदि वह किसी की निन्दा करता है या निन्दा सुनने में रुचि रखता है, तो उसका सारा पुण्य नष्ट हो सकता है। इसलिए व्यक्ति को अपने विचारों और आचरण में संयम रखना आवश्यक है।
उन्होंने एक सरल उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति हमारे सामने किसी अन्य की बुराई करता है, तो वह अपने मन का कचरा हमारे मन में डाल रहा होता है। जैसे हम किसी के डस्टबिन का कचरा अपने पास नहीं रखना चाहते, वैसे ही हमें निन्दा से दूर रहना चाहिए।
अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सकारात्मकता अपनाएं, दूसरों की अच्छाइयों को देखें और निन्दा जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहकर अपने पुण्य को सुरक्षित रखें।
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