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    अमेरिका में नया बिल, H-1B कटौती से भारतीयों पर असर तय?

    H-1B वीजा पर संकट: अमेरिकी संसद में नया विधेयक पेश, भारतीय पेशेवरों की राह हो सकती है मुश्किल

    वॉशिंगटन। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत विदेशी कामगारों और प्रवासियों को लेकर नियमों को और सख्त करने की कवायद तेज हो गई है। हाल ही में रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने अमेरिकी कांग्रेस में एक बेहद कड़ा विधेयक पेश किया है, जिसका सीधा असर भारत और चीन जैसे देशों के कुशल पेशेवरों पर पड़ सकता है।

    इस विधेयक का नाम 'एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट 2026' है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी श्रमिकों की निर्भरता कम कर अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर सुरक्षित करना बताया गया है।

    क्या है 'एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट 2026'?

    यह विधेयक एरिजोना के रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन और उनके सहयोगियों द्वारा पेश किया गया है। इन सांसदों का तर्क है कि बड़ी कंपनियां एच-1बी वीजा का दुरुपयोग कर स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के बजाय कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर रही हैं।

    विधेयक के प्रमुख और कड़े प्रस्ताव:

    1. वीजा पर 3 साल का पूर्ण प्रतिबंध: नए एच-1बी वीजा जारी करने पर तत्काल प्रभाव से तीन साल की रोक लगाने का प्रस्ताव है।

    2. सालाना कोटा में कटौती: हर साल जारी होने वाले वीजा की सीमा को 65,000 से घटाकर मात्र 25,000 करने की बात कही गई है।

    3. न्यूनतम वेतन में भारी वृद्धि: एच-1बी कर्मचारियों का सालाना न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 2 लाख डॉलर (लगभग 1.87 करोड़ रुपये) करने का सुझाव है, ताकि कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारी महंगे साबित हों।

    4. H-4 वीजा का खात्मा: पेशेवरों के जीवनसाथी और बच्चों को मिलने वाले आश्रित वीजा (H-4) को बंद करने का प्रस्ताव है।

    5. ग्रीन कार्ड की राह बंद: इस विधेयक के तहत एच-1बी धारकों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करने से रोकने का प्रावधान है।

    6. छात्रों पर असर: अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति देने वाले ओपीटी (OPT) कार्यक्रम को खत्म करने की बात कही गई है।

    7. भारी-भरकम फीस: विदेशी कर्मचारी रखने पर कंपनियों को 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस देनी होगी।


    भारत और चीन पर क्या होगा असर?

    अगर यह विधेयक कानून बनता है, तो इसका सबसे बड़ा प्रहार भारतीय आईटी सेक्टर और पेशेवरों पर होगा।

    • आंकड़े: वित्त वर्ष 2024 में कुल मंजूर एच-1बी याचिकाओं में से 71% (लगभग 2.83 लाख) भारतीय नागरिकों की थीं।

    • प्रवेश पर रोक: नए पेशेवरों के अमेरिका जाने का रास्ता लगभग बंद हो जाएगा और वहां मौजूद लोगों को भी वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

    • विकल्प: हालांकि, उच्च पदों पर बैठे अधिकारी L-1 वीजा का उपयोग जारी रख सकेंगे, लेकिन सामान्य आईटी पेशेवरों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    जानकारों का मानना है कि इस विधेयक को पारित कराना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में इसे बहुमत प्राप्त करना होगा, विशेषकर सीनेट में जहाँ 60 वोटों की आवश्यकता होती है। कई विश्लेषक इसे वास्तविक नीतिगत बदलाव के बजाय एक राजनैतिक संकेत मान रहे हैं।

    दूसरी ओर, 'इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट' जैसे समूहों का कहना है कि यह अब तक का सबसे मजबूत बिल है जो वास्तव में अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा करेगा।


    ट्रंप समर्थकों द्वारा पेश किए गए अन्य प्रमुख विधेयक:

    इस नए एक्ट से पहले भी एच-1बी कार्यक्रम को निशाना बनाने वाले कई प्रस्ताव लाए जा चुके हैं:

    • द एसिमिलेशन एक्ट: एच-1बी को पूरी तरह खत्म करने और वीजा लॉटरी बंद करने का प्रस्ताव।

    • द एक्साइल एक्ट: साल 2027 तक एच-1बी वीजा की संख्या को शून्य (0) करने की मांग।

    • द पॉज एक्ट: छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रद्द करने और एच-1बी श्रेणी को ही समाप्त करने का सुझाव।

    • $100,000 फीस नियम: राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित वह नियम जिसमें नए आवेदनों पर भारी शुल्क लगाने की बात कही गई है।

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