सहयोग सेवा संस्थान की अध्यक्ष पूजा गुप्ता से संस्था की पूरी डिटेल जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे – https://youtu.be/U10m80BGwkc?si=_sLT36cyvq5OEuJr
सहयोग संस्था : दीपावली पर खुशियां भी बांटती है
राजेश रवि , संपादक मिशनसच नेटवर्क, अलवर। तपती गर्मियों में जब सूरज आग बरसाता है, सड़कें तपने लगती हैं और इंसान तक पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस जाता है, तब एक ऐसी दुनिया भी है जो अक्सर हमारी नजरों से ओझल रह जाती है । वो है पक्षियों की दुनिया। छोटे-छोटे पंखों वाले ये जीव न तो अपनी प्यास बयां कर सकते हैं और न ही कहीं शिकायत दर्ज करा सकते हैं।ऐसे ही मौन प्राणियों की पीड़ा को समझकर वर्ष 2009 में अलवर की सहयाेग सेवा संस्थान ने जो छोटा सा कदम उठाया, वह आज एक आंदोलन का रूप ले चुका है।
एक भावुक पल से शुरू हुई पहल
यह कहानी है सेवा, संवेदना और समर्पण की एक ऐसी संस्था की, जिसने न केवल पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम किया, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को भी सहारा दिया। संस्था की अध्यक्ष पूजा गुप्ता बताती हैं कि इस पहल की शुरुआत एक भावुक क्षण से हुई। वर्ष 2009 की एक गर्म दोपहर में उनके भाई ने देखा कि चिड़ियां पानी के लिए भटक रही हैं। उसी दिन यह तय हुआ कि कुछ करना होगाऔर यहीं से “परिंडे” लगाने का सिलसिला शुरू हुआ।
छोटे प्रयास से बना बड़ा अभियान

शुरुआत में प्रयास छोटा था, लेकिन नीयत बड़ी थी। लोगों को परिंडे बांटे गए और उन्हें छतों व पेड़ों पर लगाने के लिए प्रेरित किया गया। धीरे-धीरे यह मुहिम जन-जन तक पहुंचने लगी।आज संस्था करीब 10 हजार परिंडे वितरित कर चुकी है। हर परिंडा सिर्फ एक बर्तन नहीं, बल्कि एक जीवन का सहारा है। खास बात यह है कि जब परिंडा दिया जाता है तो एक शपथ पत्र भी भरवाया जाता है जिसमें यह लिखा होता है कि परिंडा लेने वाला व्यक्ति पानी और चुग्गा डालेगा।
‘मायरा’ से बेटियों के सपनों को मिला सहारा
संस्था का कार्य केवल पक्षियों तक सीमित नहीं रहा। “मायरा” कार्यक्रम के तहत अब तक 199 जरूरतमंद बच्चियों की शादी में सहयोग किया गया है।यह सहयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। जब एक पिता अपनी बेटी की शादी को लेकर चिंतित होता है, तब यह संस्था एक परिवार की तरह उसके साथ खड़ी होती है।
बच्चों की शिक्षा में भी योगदान
संस्था सरकारी स्कूलों के बच्चों तक भी पहुंचती है। कॉपी, पेंसिल, बैग और अन्य स्टेशनरी उपलब्ध कराकर बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा किया जाता है।यह मदद भले छोटी लगे, लेकिन इन बच्चों के लिए यह उनके सपनों की शुरुआत होती है।
दीपावली पर बांटती है खुशियां
दीपावली जैसे त्योहार हर घर में एक जैसे नहीं मनाए जाते। इसे ध्यान में रखते हुए संस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक मिठाई, कपड़े और जरूरी सामान पहुंचाती है। संस्था की दीप्ति खंडेलवाल बताती हैं कि जरूरतमंद बच्चों के चेहरों पर लौटती मुस्कान ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
किसी की आफत किसी को राहत : अनोखी पहल
संस्था की एक और खास पहल है । कपड़ा वितरण अभियान। शहर के कंपनी बाग के सामने एक बैनर लगाया जाता है: “जिसके पास कपड़े हों, वह टांग जाए… जिसे जरूरत हो, वह ले जाए।”यह पहल बिना औपचारिकता के जरूरतमंदों की मदद करती है और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है।
संवेदना से ही संभव है बदलाव

संस्था से सक्रिय रुप से जुड़ी शकुन गुप्ता बताती है कि आज यह यात्रा सिर्फ आंकड़ों की नहीं10 हजार परिंडे, 199 शादियां और सैकड़ों बच्चों की मदद बल्कि एक भावना की कहानी है।संस्था जन्माष्टमी के दिन एक साथ ऐसे कई सौ बच्चों के साथ जन्मदिन मनाती है जिन्हें खुद को भी नहीं पता होता कि उनका जन्मदिन कब है। राशन वितरण आदि कार्यक्रम से भी यह संस्था जुड़ी हुई है। संस्था के वर्तमान में अमित खंडेलावाल सचिव है।
स्टोरी राइटर – वरिष्ठ पत्रकार राजेश रवि एक दशक तक जनसत्ता और ढाई दशक दैनिक भास्कर में कार्यरत रहे है। भास्कर में अलवर, भीलवाड़ा में डेढ दशक तक संपादक का जिम्मा संभाले रहे। वर्तमान में missionsach.com तथा missionsachnetwork.com नाम से वेबसाइट व missionsachnetwork के नाम से यूटयूब चैनल का संचालन करते है। संपर्क मोबाइल 9649856000। email- editor.missionsach@gmail.com
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