भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि 1 मई, देश के दो अत्यंत समृद्ध-सशक्त राज्य गुजरात और महाराष्ट्र के प्रशासनिक गठन के स्मरण का दिवस है। उनकी विकास की अद्भुत यात्राओं का अभिनंदन पर्व है। उन्होंने कहा कि भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताएँ ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं, जिनके बीच की एकता ही सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत का आधार है। महाराष्ट्र की औद्योगिक क्षमता और वित्तीय नेतृत्व के साथ गुजरात की उद्यमशीलता, व्यापारिक दक्षता, समुद्री विकास और नवकरणीय ऊर्जा विकसित भारत की मजबूत आधारशिला है।
राज्यपाल पटेल शुक्रवार को गुजरात और महाराष्ट्र राज्य के स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने दोनों राज्यों के निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। लोकभवन के सांदीपनि सभागार में “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” संकल्पना के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
राज्यपाल पटेल ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से आहवान किया कि वे हमारी विविधता की अतुलनीय ताकत को पहचानें। एकमत और एकजुट होकर विकसित भारत @2047 के लिए कार्य करें। उन्होंने इस अवसर पर “एक भारत–श्रेष्ठ भारत ” के संकल्प को साकार करने में सक्रिय सहभागिता और राष्ट्र के नव निर्माण में सर्वोत्तम योगदान का संकल्प भी दिलाया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि गुजरात में भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मन्दिर, जैसे पवित्र तीर्थ स्थल है। गुजरात की सांस्कृतिक पहचान उसके उत्सवों, विशेषकर नवरात्रि में माँ आदि शक्ति की आराधना, गरबा और डांडिया में झलकती है, जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। कच्छ का रण, गिर के वन, साबरमती का तट, माँ नर्मदा का आशीर्वाद और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी राज्य की विविधता को अद्वितीय छंटा प्रदान करते है। साबरमती के संत महात्मा गांधी एवं लौह पुरूष सरदार पटेल जैसे धरती पुत्रों ने दुनियाँ में भारत की विशिष्ट पहचान बनाई है।
उद्यमिता और नवाचार में देश के नेतृत्वकर्ता है गुजराती
राज्यपाल पटेल ने कहा कि गुजरात के लोग अपनी जीवटता, नवाचार, व्यापारिक कौशल, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था रखते है। परिश्रम और उद्यमशीलता से देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में योगदान देते हैं। आर्थिक रूप से सम्पन्न गुजरात उद्योग, व्यापार, बंदरगाह विकास और उद्यमिता में नवाचारों के बल पर देश का नेतृत्व करता है। आज गुजरात राज्य ‘ मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
महाराष्ट्र के तीर्थ स्थल समृद्ध पौराणिक, सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक
राज्यपाल पटेल ने कहा कि मेहनत, अनुशासन, समरसता, सांस्कृतिक गौरव, उद्यमशीलता और राष्ट्रनिष्ठा महाराष्ट्रवासियों की पहचान है। ये परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। महाराष्ट्र की पावन धरती पर माँ गोदावरी की अविरल धारा, सह्याद्री की भव्यता, अजंता-एलोरा की गुफाएँ, त्रयम्ब-केशवर ज्योतिर्लिंग तथा शिरडी-पंढरपुर जैसे तीर्थ, हमारी समृद्ध पौराणिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और संत नामदेव की भक्ति परंपरा ने समाज में नैतिकता, समरसता एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास किया। छत्रपति शिवाजी महाराज के अदम्य साहस और स्वराज की भावना ने भारतीयों में आत्मगौरव का संचार किया। लोकमान्य तिलक, वीर सावरकर और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे महान नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय जागरण का कार्य किया।
दोनों राज्यों की गौरवशाली लोक संस्कृति और परंपराओं पर हुई प्रस्तुतियां
राज्यपाल पटेल के समक्ष गुजरात और महाराष्ट्र राज्य की गौरवशाली लोक संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां दी गई। उन्होंने सभी आर्कषक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। समारोह में गुजराती समाज की ओर से "वायब्रेंट स्पिरिट ऑफ गुजरात" की थीम पर आकर्षक प्रस्तुति दी गई। गुजरात के राज्यपाल आर्चाय देववृत्त का संदेश का प्रसारण किया गया। गुजरात के इतिहास और कला संस्कृति पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक प्रस्तुति के अंतर्गत आई साहेब ग्रुप द्वारा राज्य की ऐतिहासिकता, आध्यात्मिकता और विरासत पर आधारित प्रस्तुति दी गई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा का संदेश और महाराष्ट्र राज्य के गठन पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल का गुजरात और महाराष्ट्र के मध्यप्रदेश में निवासरत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति के अनुरूप पारंपरिक स्वागत किया। राज्यपाल पटेल को मराठी साठा, और स्मृति चिन्ह भेंट की गई। संयुक्त समारोह में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उप सचिव सुनील दुबे, गुजराती समाज के अध्यक्ष संजय पटेल, मराठी समाज के प्रतिनिधि अभिजीत देशमुख, शैला प्रधान, दोनों राज्यों के मध्यप्रदेश में निवासरत नागरिक, लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।


