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    बरगी बांध हादसा: विमान में खराबी से 4 घंटे एयरपोर्ट पर रुका शव

    जबलपुर : जबलपुर के बरगी बांध हादसे से उपजा दर्द शनिवार को उस वक्त और गहरा गया, जब तकनीकी खामियों और खराब मौसम ने शोकाकुल परिवारों के सब्र का कड़ा इम्तिहान लिया। अपनों को खो चुके परिजनों के लिए शनिवार का दिन न केवल भावुक था, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के कारण मानसिक पीड़ा से भरा रहा।

    इस त्रासदी और उसके बाद के घटनाक्रम की पूरी रिपोर्ट नीचे दी गई है:


    एयरपोर्ट पर बढ़ा इंतजार: तकनीकी खराबी बनी बाधा

    बरगी हादसे के शिकार हुए तमिलनाडु के पर्यटकों के शवों को रविवार सुबह विशेष विमान से कोयंबटूर भेजा जाना था। परिजन सुबह 10:30 बजे ही एंबुलेंस के साथ डुमना एयरपोर्ट पहुंच गए थे, लेकिन घटनाक्रम उम्मीद के उलट रहा:

    • 4 घंटे की देरी: सुबह 11 बजे उड़ान भरने वाले विशेष विमान में अचानक तकनीकी खराबी आ गई, जिससे परिजन एयरपोर्ट पर ही फंस गए।

    • दूसरा विमान: काफी इंतजार के बाद दोपहर 2 बजे दूसरा विमान पहुंचा, जिसके बाद दोपहर 3:20 बजे दो शवों और दो परिजनों को लेकर उड़ान संभव हो सकी।

    • मौसम की मार: अन्य परिजनों के लिए खजुराहो से आने वाला विमान खराब मौसम के कारण उड़ान नहीं भर पाया। अंततः उन्हें नियमित फ्लाइट से दिल्ली के रास्ते कोयंबटूर भेजने की वैकल्पिक व्यवस्था की गई।


    क्रूज को काटकर चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन

    बांध की गहराई में डूबे क्रूज को बाहर निकालना बचाव दल के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। क्रूज की बनावट इतनी मजबूत थी कि क्रेन की मदद से उसे ऊपर लाना असंभव साबित हो रहा था।

    • कठिन निर्णय: प्रशासन ने अंततः क्रूज को पानी के अंदर ही काटने का निर्णय लिया।

    • 6 घंटे की मशक्कत: भारी मशीनों और कटर की मदद से घंटों की मेहनत के बाद क्रूज के टुकड़े किए गए, जिसके बाद मलबे को बाहर निकालकर फंसे हुए लोगों की तलाश की गई।


    सोनार तकनीक और विशेषज्ञ गोताखोरों का मोर्चा

    लापता लोगों की खोज के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है। आधुनिक संसाधनों का उपयोग करते हुए खोज अभियान जारी है:

    • डीप डाइवर्स: एनवीडीए (NVDA) के 8 विशेषज्ञ गोताखोरों की टीम को पानी की गहराई में उतारा गया है।

    • हाई-टेक खोज: पानी की तलहटी में छिपी हर वस्तु का पता लगाने के लिए सोनार उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    • संयुक्त प्रयास: एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और सेना की टीमें समन्वय के साथ काम कर रही हैं। मौके पर अतिरिक्त जनरेटर और लाइटों का इंतजाम किया गया है ताकि ऑपरेशन में कोई बाधा न आए।

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