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    Homeस्वास्थ्यधूल, गर्मी और एलर्जी से बढ़ सकती है परेशानी, अस्थमा मरीज सावधान

    धूल, गर्मी और एलर्जी से बढ़ सकती है परेशानी, अस्थमा मरीज सावधान

    भीषण गर्मी और अस्थमा—साँसों पर बढ़ता संकट, बरतें ये जरूरी सावधानियां

    बदलती जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण के बीच अस्थमा अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा; बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। साल 2026 का मार्च महीना इतिहास के सबसे गर्म महीनों में शुमार हो चुका है और अब अप्रैल-मई की तपिश ने सांस के मरीजों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता तापमान और लू (Heatwave) न केवल सामान्य लोगों के लिए, बल्कि क्रॉनिक रेस्पिरेटरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए 'रेड अलर्ट' है।

    क्या गर्मियों में भी बढ़ता है अस्थमा का खतरा?

    अक्सर लोग अस्थमा को केवल सर्दियों की बीमारी मानते हैं, लेकिन गर्मी और उमस भी इसके बड़े 'ट्रिगर' हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

    • प्रदूषण और एलर्जेंस: गर्मी में हवा के साथ धूल-मिट्टी, परागकण (Pollen) और प्रदूषक तत्व तेजी से फैलते हैं।

    • गर्म हवा: लू या अत्यधिक गर्म हवा में सांस लेना फेफड़ों की नलियों के लिए कठिन होता है, जिससे वे संकुचित हो जाती हैं।

    • ह्यूमिडिटी (उमस): उमस भरी गर्मी फेफड़ों के मार्ग में सूजन बढ़ा सकती है, जिससे सांस फूलने की समस्या शुरू हो जाती है।

    एसी (AC) का उपयोग भी पड़ सकता है भारी

    गर्मियों में हम राहत के लिए एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं, लेकिन यदि एसी की नियमित सफाई न हो, तो उसमें जमा धूल, बैक्टीरिया और फंगस सीधे फेफड़ों में पहुँचते हैं। यह अस्थमा अटैक का एक बड़ा कारण बन सकता है। इसके अलावा, बाहर की तेज गर्मी से अचानक ठंडे कमरे में आना भी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।

    बचाव के लिए विशेषज्ञों की खास सलाह

    अस्थमा के मरीज इन उपायों को अपनाकर गर्मियों में सुरक्षित रह सकते हैं:

    1. मास्क का प्रयोग: बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें ताकि धूल और परागकणों से बचाव हो सके।

    2. हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी श्वसन तंत्र को और अधिक संवेदनशील बना देती है।

    3. घर की स्वच्छता: घर में धूल और फफूंदी (Mold) न जमने दें। एसी की सर्विस समय पर करवाएं।

    4. व्यायाम का समय: तेज धूप में बाहर एक्सरसाइज न करें। सुबह या शाम के ठंडे समय में प्राणायाम और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।

    5. धूम्रपान से दूरी: बीड़ी-सिगरेट से पूरी तरह परहेज करें और पैसिव स्मोकिंग (दूसरों के धुएं) से भी बचें।

    6. पोषक आहार: अपनी डाइट में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन-सी और ओमेगा-3 युक्त चीजें शामिल करें जो फेफड़ों को मजबूती देती हैं।

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