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    Homeस्वास्थ्यगर्मी का असर अस्थमा पर, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

    गर्मी का असर अस्थमा पर, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

    गर्मियों में अस्थमा के मरीजों के लिए बढ़ती चुनौतियों पर आधारित आपकी इस जानकारी को मैंने और अधिक व्यवस्थित और स्पष्ट तरीके से तैयार किया है:


    सावधान! गर्मी का बढ़ता पारा बढ़ा सकता है अस्थमा की मुसीबत: एक्सपर्ट की सलाह

    अक्सर माना जाता है कि सर्दियों का मौसम अस्थमा के मरीजों के लिए कठिन होता है, लेकिन डॉ. नीतू जय (सीनियर कंसल्टेंट, PSRI अस्पताल) के अनुसार, चिलचिलाती गर्मी, धूल और बढ़ता प्रदूषण भी अस्थमा अटैक का बड़ा कारण बन सकते हैं।

    गर्मी में अस्थमा बढ़ने के मुख्य कारण

    1. शुष्क हवा और डिहाइड्रेशन गर्मी के कारण हवा में नमी कम हो जाती है और वह शुष्क (Dry) हो जाती है। जब यह शुष्क हवा सांस के जरिए शरीर में जाती है, तो सांस की नलियों में सूजन और जलन पैदा कर सकती है। इसके साथ ही शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) श्वसन तंत्र को और अधिक संवेदनशील बना देती है।

    2. ओजोन स्तर में बढ़ोतरी तेज धूप और प्रदूषण के मिलने से ज़मीनी स्तर पर ओजोन गैस बढ़ जाती है। यह गैस फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक है, जो सांस की नलियों को सिकोड़ देती है। इससे खांसी और सांस लेने में तकलीफ (Wheezing) जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

    3. एयर कंडीशनर (AC) का गलत इस्तेमाल

    • फंगस और धूल: यदि एसी के फिल्टर गंदे हैं, तो उसमें जमा फंगस और एलर्जी पैदा करने वाले कण कमरे की हवा में फैल जाते हैं।

    • तापमान का अचानक बदलाव: चिलचिलाती धूप से सीधे ठंडे एसी वाले कमरे में आना या इसके विपरीत करना शरीर के लिए 'थर्मल शॉक' जैसा होता है, जो तुरंत अस्थमा ट्रिगर कर सकता है।


    बचाव के प्रभावी उपाय

    अस्थमा के मरीज इन आसान सावधानियों के जरिए गर्मियों में खुद को सुरक्षित रख सकते हैं:

    • हाइड्रेशन है जरूरी: फेफड़ों की झिल्लियों को नम रखने के लिए दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।

    • पीक ऑवर्स में घर के अंदर रहें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब गर्मी और ओजोन स्तर सबसे अधिक होता है, बाहर निकलने से बचें।

    • मास्क का प्रयोग: यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो धूल और एलर्जी के कणों से बचने के लिए मास्क जरूर पहनें।

    • एसी की सर्विसिंग: अपने एसी और कूलर की नियमित सफाई सुनिश्चित करें ताकि हवा शुद्ध बनी रहे।

    • दवाइयों का नियमित सेवन: अपना इन्हेलर हमेशा साथ रखें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं में लापरवाही न बरतें।


    विशेष नोट: अगर आपको सांस लेने में अधिक कठिनाई महसूस हो रही हो या इन्हेलर का असर कम लग रहा हो, तो तुरंत अपने पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के विशेषज्ञ) से संपर्क करें।

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