टीकाराम जूली बोले- NEET पेपर लीक की खबरों से टूटा छात्रों और अभिभावकों का भरोसा, कोटा प्रसूता मौत मामले में न्यायिक जांच की मांग
जयपुर। टीकाराम जूली ने NEET परीक्षा पेपर लीक से जुड़ी खबरों को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है। यह केवल परीक्षा प्रणाली पर सवाल नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले में राजस्थान के सीकर सहित अन्य स्थानों का नाम सामने आना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो उनका मनोबल टूटता है और पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए ताकि पर्दे के पीछे सक्रिय असली दोषियों और भर्ती माफियाओं को सामने लाया जा सके।
मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल
टीकाराम जूली ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनावी सभाओं में बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि भाजपा सरकार में पेपर लीक नहीं होंगे, लेकिन आज वास्तविक स्थिति सबके सामने है। उन्होंने कहा कि इससे पहले ओएमआर शीट गड़बड़ी के मामलों में भी सरकार ने स्पष्ट स्थिति नहीं बताई।
उन्होंने कहा कि सरकार की चुप्पी युवाओं में अविश्वास पैदा कर रही है। केवल मंचों से भाषण देने और जमीनी स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने में बड़ा अंतर होता है, जिसका नुकसान आज प्रदेश के युवा भुगत रहे हैं।
भाजपा पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा पर युवाओं के मुद्दों पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने पेपर लीक को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था और युवाओं को बड़े-बड़े वादे किए थे।
उन्होंने कहा कि आज भाजपा शासन में ही NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे सरकार का दोहरा चेहरा उजागर हो गया है।
टीकाराम जूली ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह किसी दल का नहीं बल्कि देश के भविष्य का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं।
कांग्रेस सरकार के कानून का किया उल्लेख
उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए देश के सबसे कठोर कानूनों में से एक कानून लागू किया था ताकि भर्ती माफियाओं में डर पैदा हो और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की शिथिलता के कारण भर्ती माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
कोटा प्रसूता मौत मामले में न्यायिक जांच की मांग
टीकाराम जूली ने कोटा में प्रसूताओं की मौत की घटनाओं पर भी गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने इसे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए कहा कि यह केवल एक चिकित्सकीय त्रुटि नहीं बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि एक मां की असामयिक मृत्यु पूरे परिवार को जीवनभर का दर्द दे जाती है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है।
नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।
तेल-गैस संकट और सोना खरीदने की अपील पर भी हमला
टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और हालिया अपीलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण देश में तेल और गैस संकट की स्थिति बनी हुई है, लेकिन सरकार ने समय रहते गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते।” पहले चुनावी दौरों में हेलीकॉप्टर उड़ाए जाते रहे और अब आम जनता को बचत की सीख दी जा रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोना न खरीदने की अपील पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले कांग्रेस पर मंगलसूत्र छीनने जैसे आरोप लगाए गए और अब खुद जनता को सोना न खरीदने की सलाह दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को जनता पर नैतिक भाषण देने के बजाय महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।
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