अपना रंगमंच की थिएटर वर्कशॉप में तैयार प्रस्तुति ने पिता-पुत्र संबंध और पर्यावरण संरक्षण का दिया भावनात्मक संदेश
अलवर। अपना रंगमंच थिएटर ग्रुप द्वारा आयोजित थिएटर वर्कशॉप का 11वां दिन भावनात्मक और यादगार प्रस्तुतियों के नाम रहा। इस अवसर पर कंपनी बाग में आयोजित ओपन स्टेज शो में छात्रों द्वारा तैयार किए गए नाटक ने दर्शकों को भावुक कर दिया और प्रस्तुति चर्चा का विषय बन गई।
वर्कशॉप के दौरान छात्रों को दिए गए ‘सीन वर्क’ से विकसित कहानी को आधार बनाकर यह नाटक तैयार किया गया। खास बात यह रही कि स्क्रिप्ट तैयार करने से लेकर मंचन तक की पूरी प्रक्रिया केवल दो घंटे में पूरी की गई। सीमित समय में तैयार हुई इस प्रस्तुति ने अपनी संवेदनशील कहानी और प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचा।
नाटक नुक्कड़ शैली में प्रस्तुत किया गया, लेकिन इसकी प्रस्तुति में यथार्थवादी अभिनय और वास्तविक जीवन से जुड़ी परिस्थितियों की झलक साफ दिखाई दी। कलाकारों ने संवाद, भाव-भंगिमा और प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को कहानी से पूरी तरह जोड़ दिया।
नाटक की कहानी ‘रामस्वरूप काका’ नामक पात्र के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका बेटा अमेरिका में रहता है। वृद्ध पिता लंबे समय से बेटे के फोन का इंतजार करते हैं, लेकिन बार-बार कॉल करने के बावजूद बेटा फोन नहीं उठाता। कहानी में भावनात्मक मोड़ तब आता है जब अचानक बेटे का फोन आता है।
यह प्रस्तुति केवल पिता-पुत्र के रिश्तों की संवेदनशीलता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें ऑक्सीजन, अरावली पर्वतमाला और पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी प्रभावी तरीके से जोड़ा गया। नाटक ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में रिश्तों और प्रकृति दोनों की अनदेखी समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान दर्शकों का जुड़ाव इतना गहरा रहा कि कई लोग भावुक हो उठे और उनकी आंखों में आंसू दिखाई दिए। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद दर्शकों ने कलाकारों और टीम की सराहना करते हुए नाटक के विषय और अभिनय की प्रशंसा की।
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