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    Homeराज्ययूपीखुद को क्षत्रिय महासभा का महासचिव बताने वाला राज चर्चा में

    खुद को क्षत्रिय महासभा का महासचिव बताने वाला राज चर्चा में

    बलिया| पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। कोलकाता पुलिस ने यूपी एसटीएफ के सहयोग से इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों में बिहार के बक्सर निवासी मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का रहने वाला राज सिंह शामिल है।

    अयोध्या से हुई राज सिंह की गिरफ्तारी

    राज सिंह, जो खुद को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का प्रदेश महासचिव बताता था, बलिया के आनंद नगर का निवासी है। उस पर पहले से ही तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। यूपी एसटीएफ और बंगाल पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे 9 मई को अयोध्या के नगर कोतवाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया, जिसके बाद उसे हवाई मार्ग से पश्चिम बंगाल ले जाया गया। राज सिंह की मां जामवंती देवी ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है।

    टोल प्लाजा के 'डिजिटल फुटप्रिंट' ने खोल दी पोल

    जांच एजेंसियों को आरोपियों तक पहुँचने में 'फास्ट टैग' और 'यूपीआई' (UPI) भुगतान से बड़ी मदद मिली। हत्या के बाद भागते समय शूटरों ने चांदी के रंग की लग्जरी कार का इस्तेमाल किया था। बाली टोल प्लाजा पर आरोपियों ने टैक्स भरने के लिए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किया, जिससे उनका मोबाइल नंबर ट्रेस हो गया। साथ ही टोल प्लाजा पर लगे हाई-डेफिनेशन कैमरों ने उनकी पहचान पूरी तरह स्पष्ट कर दी।

    झारखंड के कारोबारी की कार का इस्तेमाल

    सूत्रों के अनुसार, हत्या में इस्तेमाल की गई गाड़ी झारखंड के एक व्यवसायी की है। आरोपी मयंक मिश्रा इस वाहन को चोरी-छिपे बंगाल ले गया था। भागने के दौरान मयंक ने अपने ही फास्ट टैग का इस्तेमाल किया, जो पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ।

    रसूख और आपराधिक बैकग्राउंड

    राज सिंह के बारे में जानकारी मिली है कि वह राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता था। वह अक्सर सत्ताधारी पार्टी के झंडे लगी गाड़ियों में घूमता था और सोशल मीडिया पर पुलिस व बड़े नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें साझा कर रौब जमाता था। साल 2020 में उस पर एक दिव्यांग दुकानदार की हत्या का भी आरोप लगा था, जिसमें वह फिलहाल जमानत पर बाहर था।

    जांच का दायरा बढ़ा

    फिलहाल कोलकाता पुलिस और यूपी-बिहार की जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस हत्याकांड के पीछे मुख्य साजिशकर्ता कौन है और हत्या का असली उद्देश्य क्या था। स्थानीय स्तर पर राज सिंह के संपर्कों और उसे मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

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