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    हाई कोर्ट में केंद्र का बड़ा बयान: अग्निवीर नियमित सैनिकों के समान नहीं

    मुंबई। अग्निपथ योजना और अग्निवीरों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही एक अहम सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। केंद्र ने अदालत में हलफनामा दायर कर साफ कहा है कि अग्निवीर नियमित सैनिकों के समान नहीं हैं, इसलिए उन्हें नियमित सैनिकों की तरह पेंशन और मरणोपरांत मिलने वाली अन्य सुविधाएं नहीं दी जा सकतीं। यह जवाब शहीद अग्निवीर मुरली नायक की मां द्वारा दायर उस याचिका के विरोध में आया है, जिसमें नियमित सैनिकों की तरह लाभ देने की मांग की गई थी।

    अग्निवीर और नियमित सैनिक: सरकार का तर्क

    केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि अग्निपथ योजना एक अल्पकालिक सेवा है, जिसे आज की राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सरकार के अनुसार:

    • निश्चित कार्यकाल: अग्निवीरों की नियुक्ति केवल चार साल के लिए होती है, जबकि पेंशन जैसे लाभ लंबी अवधि की नियमित सेवा से जुड़े होते हैं।

    • भेदभाव नहीं, वर्गीकरण: सरकार ने तर्क दिया कि दो अलग-अलग श्रेणियों (नियमित सैनिक और अग्निवीर) के बीच समानता का दावा नहीं किया जा सकता। यह वर्गीकरण भर्ती की शर्तों और सेवा की प्रकृति पर आधारित है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत पूरी तरह वैध है।

    • नीतिगत निर्णय: हलफनामे में स्पष्ट किया गया कि यह सशस्त्र बलों की भर्ती से जुड़ा एक नीतिगत फैसला है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित होता है।

    याचिकाकर्ता की मांग और भेदभाव का आरोप

    यह पूरा मामला महाराष्ट्र के मुरली नायक की शहादत से जुड़ा है, जो पिछले साल 9 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान शहीद हो गए थे। उनकी मां, ज्योतिबाई नायक ने याचिका में आरोप लगाया है कि:

    • अग्निपथ योजना अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच 'मनमाना भेदभाव' करती है।

    • चूंकि अग्निवीर भी ड्यूटी के दौरान वही जोखिम उठाते हैं जो एक नियमित सैनिक उठाता है, इसलिए शहादत के बाद मिलने वाले लाभों (पेंशन और कल्याणकारी योजनाएं) में अंतर नहीं होना चाहिए।

    शहीद परिवार को मिली आर्थिक सहायता

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने यह भी जानकारी दी कि शहीद मुरली नायक का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया था। सरकार ने अदालत को बताया कि:

    • शहीद के परिवार को अब तक कुल 2.3 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।

    • रेजिमेंट की ओर से परिवार को औपचारिक संवेदना पत्र और अन्य अनुग्रह राशि भी प्रदान की गई है।

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