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    उमंग सिंघार बोले: मध्यप्रदेश में BJP सरकार ने भ्रष्टाचार को उद्योग बना दिया

    महू: मध्यप्रदेश में बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पानी की आपूर्ति को लेकर अब प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है।

    आयोजन में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि अब महापुरुषों के सम्मान में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों को भी भ्रष्टाचार का जरिया बनाया जा रहा है। उन्होंने सरकारी धन की खुली लूट का दावा करते हुए कहा कि महू के कार्यक्रम में पानी की बोतलों और कैन की आपूर्ति में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे सीधे तौर पर धांधली की ओर इशारा कर रहे हैं। सिंघार के अनुसार जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग करने के लिए अब ऐसे संवेदनशील अवसरों का सहारा लिया जा रहा है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

    वितरण और बिलिंग के आंकड़ों में भारी अंतर

    मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने बताया कि समारोह के दौरान पानी की 20 लीटर वाली कैन को बाजार की वास्तविक दरों से कहीं अधिक कीमत पर खरीदा गया है। इसके साथ ही बोतलबंद पानी की जितनी खपत दिखाई गई है और जितने का बिल तैयार किया गया है, उन दोनों आंकड़ों के बीच एक बड़ा फासला नजर आता है। नेता प्रतिपक्ष ने तीखा सवाल किया है कि जब लाखों बोतलों के वितरण का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो फिर भारी-भरकम भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है।

    सत्तापक्ष और अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल

    कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को मंत्रियों, अधिकारियों और ठेकेदारों के एक संगठित गठजोड़ का परिणाम बताया है और मुख्यमंत्री से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। उमंग सिंघार ने व्यापमं और पोषण जैसे पुराने मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार अब एक उद्योग की तरह पैर पसार चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधा प्रश्न किया है कि क्या इस मामले के दोषियों पर कोई कड़ी कार्रवाई की जाएगी या फिर हर बार की तरह भ्रष्टाचारियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त होता रहेगा।

    टेंडर की शर्तों और वास्तविक खर्च का विवाद

    दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक महू में 14 अप्रैल को हुए इस आयोजन में पानी की खरीद को लेकर कई विसंगतियां पाई गई हैं, जिनमें स्वीकृत मात्रा से अधिक का बिल बनाना प्रमुख है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि बाजार भाव को नजरअंदाज कर पानी के कैंपर ऊंचे दामों पर लिए गए और मौके पर किए गए वास्तविक वितरण और कागजों पर दिखाए गए खर्च में कोई मेल नहीं है। इसी वित्तीय असंतुलन ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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