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    Homeबिजनेसएक लाइसेंस, 100 किलो सीमा: सोने के आयात पर सख्त कदम

    एक लाइसेंस, 100 किलो सीमा: सोने के आयात पर सख्त कदम

    नई दिल्ली: देश के बढ़ते आयात खर्च और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ते बोझ को देखते हुए सरकार ने सोने के शुल्क-मुक्त आयात से जुड़े नियमों को पहले से कहीं अधिक कड़ा कर दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स के लिए पांच नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिन्हें तुरंत लागू कर दिया गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सोने के व्यापार में पारदर्शिता लाना और अनावश्यक आयात पर लगाम लगाना है।

    आयात की सीमा और पात्रता के कड़े मानक

    नए प्रावधानों के अंतर्गत अब अग्रिम प्राधिकार योजना के तहत एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलो सोना ही बिना शुल्क के मंगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पहली बार आवेदन करने वाले व्यापारियों के कार्यस्थलों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कारोबारी को दूसरा आयात लाइसेंस केवल तभी प्रदान किया जाएगा जब उसने अपने पिछले लाइसेंस से जुड़े निर्यात लक्ष्य का कम से कम आधा हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया हो।

    निगरानी और रिपोर्टिंग की द्वि-साप्ताहिक व्यवस्था

    पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए अब लाइसेंस धारकों को अपने हर लेन-देन का पूरा विवरण प्रत्येक 15 दिनों में साझा करना होगा जिसे एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित कराना अनिवार्य है। केवल व्यापारियों पर ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय कार्यालयों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है कि वे हर महीने अपने सभी लाइसेंसों और गतिविधियों की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। इस त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र के माध्यम से सरकार सोने के अवैध इस्तेमाल को रोकने और रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने की योजना बना रही है।

    उद्योग की आशंकाएं और बढ़ता व्यापार घाटा

    सरकार द्वारा आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के तुरंत बाद लिए गए इस फैसले ने रत्न एवं आभूषण जगत में हलचल पैदा कर दी है। कारोबारियों का मानना है कि करों में वृद्धि और सख्त नियमों के कारण बाजार में तस्करी और ग्रे-मार्केट की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। यह चिंताजनक स्थिति ऐसे समय में बनी है जब भारत का स्वर्ण आयात पिछले वित्त वर्ष में 24 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ लगभग 72 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है।

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