चेन्नई: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा से छूट देने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रहे पेपर लीक, गंभीर अनियमितताओं और छात्रों के बीच पैदा हुए अविश्वास को देखते हुए अब राज्यों को कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर ही मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में दाखिला देने की अनुमति मिलनी चाहिए।
नीट व्यवस्था की विफलताओं पर उठाए सवाल
एमके स्टालिन ने ध्यान दिलाया कि 3 मई को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के कारण रद्द करना पड़ा, जिसने देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच चल रही है और अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह परीक्षा प्रणाली लगातार नाकाम साबित हो रही है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि वे महंगे कोचिंग सेंटरों का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
पुराने 'प्री-नीट मॉडल' को दोबारा लागू करने की वकालत
प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में स्टालिन ने तमिलनाडु के पुराने 'प्री-नीट' दाखिला मॉडल को फिर से बहाल करने की वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि पहले राज्य में मेडिकल कॉलेजों की सीटें 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही भरी जाती थीं, जिससे सरकारी स्कूलों, ग्रामीण क्षेत्रों और वंचित समुदायों के बच्चों को डॉक्टरों के रूप में आगे आने का समान अवसर मिलता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी पुरानी व्यवस्था के कारण तमिलनाडु में एक बेहद मजबूत और समावेशी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण हो सका था।
अध्यादेश लाने और लंबित विधेयक को मंजूरी देने की मांग
इस संकट से छात्रों को तुरंत राहत दिलाने के लिए डीएमके प्रमुख ने केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत एक विशेष अध्यादेश लाने का अनुरोध किया है, ताकि आगामी 2026-27 के सत्र के लिए नीट की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा द्वारा दो बार सर्वसम्मति से पारित किए जा चुके 'तमिलनाडु अंडरग्रेजुएट मेडिकल डिग्री कोर्सेज बिल 2021' का भी हवाला दिया, जो राज्य के छात्रों को राहत देने के उद्देश्य से बनाया गया था लेकिन वर्तमान में राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए लंबित है।
परीक्षा प्रणाली में आपराधिक नेटवर्क की घुसपैठ का आरोप
स्टालिन ने अपने पत्र में केवल इस वर्ष की घटना ही नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की कई बड़ी चूकों का भी ब्यौरा दिया। उन्होंने साल 2015 के एआईपीएमटी (AIPMT) पेपर लीक, 2016 के अंतरराज्यीय लीक, 2017 में अनुवाद संबंधी त्रुटियों और 2020 से 2022 के बीच सक्रिय रहे सॉल्वर गैंग तथा फर्जी उम्मीदवारों के रैकेट का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कोचिंग सेंटरों की सांठगांठ से बायोमेट्रिक सिस्टम तक से छेड़छाड़ की जा चुकी है, जो दर्शाता है कि इस परीक्षा प्रणाली में संगठित आपराधिक नेटवर्क की गहरी घुसपैठ हो चुकी है।


