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    लंबे समय तक काम का दबाव बन रहा गंभीर स्वास्थ्य समस्या की वजह

    दफ्तर की कुर्सी कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही? मोटापा और तनाव घटाने के लिए अब विशेषज्ञों ने दी '4-डे वर्क वीक' की सलाह

    सुबह तड़के उठकर दफ्तर भागना, दिन के 8-9 घंटे लगातार कुर्सी पर बैठकर स्क्रीन से चिपके रहना और देर रात तक काम का दबाव झेलना— आज की आधुनिक जीवनशैली का मुख्य हिस्सा बन चुका है। करियर की दौड़ में यह भले ही जरूरी लगे, लेकिन हालिया चिकित्सा अध्ययन बताते हैं कि यह आदत युवाओं को साइलेंट किलर की तरह अंदर ही अंदर बीमार कर रही है। इसी जोखिम को देखते हुए अब स्वास्थ्य विशेषज्ञ कंपनियों और सरकारों को हफ्ते में केवल चार दिन काम (4-Day Work Week) का नियम अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

    लगातार बैठने से घट रही है कैलोरी बर्न करने की क्षमता

    चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक बिना किसी शारीरिक गतिविधि के बैठे रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, जिससे कैलोरी बर्न करने की क्षमता घटती है। यही कारण है कि आज के कामकाजी युवाओं में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, क्रोनिक स्ट्रेस (गंभीर तनाव), डिप्रेशन, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलियाई शोध का दावा: काम के घंटे घटने से कम होगा मोटापा

    इस्तांबुल में आयोजित 'यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी' में पेश की गई एक रिपोर्ट में साल 1990 से 2022 के बीच दुनिया के 33 देशों के वर्किंग पैटर्न और वहां के नागरिकों में मोटापे की दर का विश्लेषण किया गया।

    • चौंकाने वाला गणित: शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि सालाना काम के घंटों में महज 1% की कटौती की जाए, तो मोटापे की दर में 0.16% की गिरावट आ सकती है।

    • तनाव हार्मोन का खेल: क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के डॉ. प्रदीप कोराले-गेदारा के मुताबिक, ज्यादा देर काम करने से शरीर में 'कोर्टिसोल' (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर वजन बढ़ाने और पेट की चर्बी के लिए जिम्मेदार है। काम के घंटे 20% कम करने (यानी 4 दिन का हफ्ता करने) से कर्मचारियों को व्यायाम और पौष्टिक खान-पान के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

    इन देशों में पहले से लागू है छोटा वर्किंग वीक

    दुनिया के कई देश इस दिशा में प्रगतिशील कदम उठा चुके हैं:

    • यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE): यहाँ संघीय सरकार और कई निजी संस्थान हफ्ते में केवल 4.5 दिन काम करते हैं, जहां शुक्रवार दोपहर बाद छुट्टी हो जाती है। वहीं, यूएई के 'शारजाह' में सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य रूप से 4 दिनों का कार्य-सप्ताह लागू है।

    • जापान: वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बनाने के लिए जापान सरकार अपनी कंपनियों को स्वेच्छा से 4-डे वर्क मॉडल अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

    • नॉर्डिक देश: डेनमार्क, फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देशों में काम के घंटे कम हैं, जिसके कारण वहां मेक्सिको, अमेरिका और कोलंबिया जैसे अधिक काम के घंटों वाले देशों के मुकाबले मोटापे और हृदय रोगों की दर काफी कम पाई गई है।

    आलोचकों का तर्क

    हालांकि, इस थ्योरी के विरोधियों का मानना है कि 5 दिन के वेतन पर 4 दिन काम कराने का मॉडल आर्थिक दृष्टिकोण से व्यावहारिक नहीं है। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है या कर्मचारियों की कुल आय पर असर पड़ सकता है।

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