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अरावली में खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फिलहाल नहीं मिलेगी राहत
नई दिल्ली: Supreme Court of India ने अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखला में जारी गतिविधियों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाएगा। अदालत ने कहा कि अरावली क्षेत्र से सामने आ रही जमीनी रिपोर्ट और प्रतिक्रियाएं बेहद चिंताजनक हैं तथा इस मामले से गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे जुड़े हुए हैं। ऐसे में बिना पूरी जांच और संतुष्टि के किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
टुकड़ों में नहीं होगी सुनवाई, पर्यावरण संरक्षण सर्वोपरि
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर टुकड़ों में या अलग-अलग हिस्सों में सुनवाई नहीं की जाएगी। पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक अदालत अरावली की स्थिति और उसके संरक्षण को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक वहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर किसी खनन पट्टे को रद्द किया जाता है तो प्रभावित पक्ष के पास उसे कानूनी रूप से चुनौती देने का अधिकार रहेगा, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में अदालत खनन धारकों को कोई राहत देने के पक्ष में नहीं है।
अरावली की परिभाषा तय करने के लिए विशेषज्ञ समिति पर विचार
मामले का मुख्य विवाद अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखला की एक स्पष्ट और सर्वमान्य परिभाषा तय करने को लेकर है। इसी वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिए थे कि वे ऐसे विशेषज्ञों के नाम सुझाएं, जिन्हें इस विषय पर गठित विशेष समिति में शामिल किया जा सके।
अदालत का मानना है कि जब तक वैज्ञानिक और भौगोलिक आधार पर अरावली की सीमाएं स्पष्ट नहीं होंगी, तब तक इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला का प्रभावी संरक्षण संभव नहीं है।
पहले भी लगा चुकी है रोक
अरावली संरक्षण को लेकर यह कानूनी मामला पिछले वर्ष से लगातार चर्चा में है। 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की एक समान परिभाषा को मंजूरी देते हुए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में इसके दायरे में आने वाले नए खनन पट्टों पर रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट आने तक नए खनन कार्यों की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उस समय पर्यावरण मंत्रालय की समिति ने सिफारिश की थी कि निर्धारित जिलों में स्थानीय धरातल से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची भू-आकृति को “अरावली पहाड़ी” माना जाए, जबकि 500 मीटर के दायरे में स्थित ऐसी दो या अधिक पहाड़ियों के समूह को “अरावली रेंज” की श्रेणी में रखा जाए।
हालांकि, इस परिभाषा को लेकर विवाद बढ़ने के बाद 29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने 20 नवंबर के आदेश को स्थगित कर दिया था और पूरे क्षेत्र में सभी प्रकार की खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी।
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