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    दमोह में दुकान बंद होने के बाद भी धड़ल्ले से बिक रही शराब, सामने ही युवक ने खोला ढक्कन

    दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार बिना किसी प्रशासनिक खौफ के फल-फूल रहा है। इलाके में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर शराब दुकानों के शटर बंद होने के बावजूद खुलेआम जाम छलकने का एक सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बंद दुकान के बाहर बेखौफ खड़े शौकीनों को एक युवक बगल के गुप्त रास्ते से लाकर धड़ल्ले से बोतलें सप्लाई कर रहा है और लोग बिना किसी डर के दुकान के ठीक सामने ही ढक्कन खोलकर शराब गटक रहे हैं। इस वीडियो के सार्वजनिक होने से जहां आबकारी और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, वहीं जिम्मेदार अधिकारी हर बार की तरह केवल जांच और कार्रवाई का रटा-रटाया राग अलापकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।

    लग्जरी कार से पकड़ी गई 34 पेटी शराब, फिर भी मेहरबान रही पुलिस

    दमोह पुलिस की कार्यप्रणाली और संदिग्ध भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल रविवार शाम को तब खड़ा हुआ, जब तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत जबलपुर स्टेट हाईवे पर एक लग्जरी कार के जरिए की जा रही भारी मात्रा में अवैध शराब की तस्करी पकड़ी गई। भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं ने घेराबंदी करके इस कार को दबोचा, जिसमें से कुल 34 पेटी अवैध शराब बरामद की गई। कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बड़ी गाड़ियों के जरिए शराब की अवैध खेप ग्रामीण इलाकों में खपाई जा रही थी। हैरान करने वाली बात यह रही कि शराब से लदी कार के पकड़े जाने और आरोपियों के रंगे हाथों हिरासत में होने के बावजूद, पुलिस तस्करों पर इतनी मेहरबान दिखी कि घंटों बीत जाने के बाद भी मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई, जिससे खाकी और तस्करों की कथित सांठगांठ की बू आ रही है।

    एफआईआर के लिए थाने के बाहर रातभर गूंजे नारे, धरने पर बैठे कार्यकर्ता

    पुलिस के इस टालमटोल वाले रवैये और आरोपियों को परोक्ष रूप से बचाने की कोशिशों से नाराज होकर संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने तेंदूखेड़ा थाने का घेराव कर दिया। न्याय की मांग को लेकर आक्रोशित कार्यकर्ताओं को पूरी रात थाने के सामने कड़कड़ाती ठंड और खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठना पड़ा। रातभर चले इस उग्र प्रदर्शन के कारण इलाके की कानून व्यवस्था और पुलिस की साख दोनों दांव पर लग गई, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार दरोगा और थाना प्रभारी मामले की कायमी करने से कतराते रहे। कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस और तेंदूखेड़ा शराब दुकान के मैनेजर की मिलीभगत से ही इस पूरे सिंडिकेट को चलाया जा रहा है, जिसकी वजह से युवा पीढ़ी नशे के दलदल में धंसती जा रही है।

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