सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व माना गया है. घर में पौधे लगाने से वातावरण सुंदर होने के साथ सकारात्मकता और शांति का अनुभव भी होता है. हालांकि वास्तु मान्यताओं के अनुसार, हर पौधा घर के लिए शुभ नहीं माना जाता. कुछ पौधों को नकारात्मक ऊर्जा, रुकावट और ठहराव से जोड़कर देखा जाता है. ऐसी स्थिति में चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि आखिर वह कौन से पौधे हैं, जिसे घर से तुरंत बाहर कर देना चाहिए.
सूखे और मुरझाए पौधे
अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, वास्तु शास्त्र और फेंगशुई में घर के पौधों की स्थिति और उनकी देखभाल को महत्वपूर्ण माना गया है. यदि घर में सूखे, सड़े या अत्यधिक फैलने वाले पौधे हैं, तो उन्हें हटाना बेहतर माना जाता है. घर में लंबे समय तक मुरझाए या पूरी तरह सूख चुके पौधे रखना वास्तु के अनुसार शुभ नहीं माना जाता. इन्हें ठहराव और नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. इसलिए सूखी पत्तियों को हटाते रहें और पौधे के खराब होने पर उसे बदल दें.
दूधिया रस वाले पौधे
मिल्कवीड और यूफोरबिया जैसे कुछ पौधों से सफेद दूध जैसा रस निकलता है. वास्तु मान्यताओं में ऐसे पौधों को घर के भीतर रखने से बचने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा इनका रस त्वचा या आंखों के संपर्क में आने पर नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए बच्चों और पालतू जानवरों से इन्हें दूर रखना जरूरी है.
दीवार पर फैलने वाली बेलें
घर की दीवारों पर सीधे चढ़ने वाली बेलें देखने में आकर्षक लगती हैं, लेकिन इन्हें वास्तु में रुकावट का प्रतीक माना जाता है. व्यावहारिक रूप से भी बेलों से दीवार में नमी और क्षति हो सकती है. इन्हें जाली या अलग सहारे पर उगाना बेहतर विकल्प है. प्लास्टिक, कपड़े या रेशम से बने नकली पौधे सजावट में सुंदर लग सकते हैं, लेकिन इनमें प्राकृतिक पौधों जैसे पर्यावरणीय लाभ नहीं होते. इन पर धूल जमा होने से कमरा भी अस्त-व्यस्त लग सकता है.
पंडित कल्कि राम ने कहा कि घर में संभव हो तो प्राकृतिक पौधों को प्राथमिकता दें. वहीं पानी में रखे पौधों, गमलों या इनडोर फाउंटेन की सफाई न होने पर काई और शैवाल जम सकते हैं. वास्तु मान्यताओं में इन्हें ठहराव का संकेत माना जाता है. इसलिए पानी को नियमित रूप से बदलें और गमलों की साफ-सफाई करते रहें.


