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    मलमास में दामाद को दें मालपुआ संग सोना! भगवान विष्णु समान मानते हैं शास्त्र, भर सकती है झोली

    अधिक मास यानी मलमास महीना हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है. इस पूरे महीने भगवान विष्णु की आराधना, दान और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व रहता है. मान्यता है कि अगर इस दौरान दामाद को मालपुआ के साथ सोने का दान दिया जाए, तो परिवार में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है. पटना के ज्योतिषाचार्य पंडित ओम तिवारी के अनुसार, शास्त्रों में दामाद को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है. यही वजह है कि मलमास में दामाद का सम्मान और उन्हें शुभ वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. कहा जाता है कि इससे रिश्तों में प्रेम बढ़ता है और घर-परिवार पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है.
    दामाद को करिए मालपुए के साथ गोल्ड का दान
    ज्योतिषाचार्य पंडित ओम तिवारी के अनुसार, श्रीकृष्ण पंचांग और धर्मशास्त्रों में अधिक मास के 33 देवताओं का उल्लेख मिलता है. यही कारण है कि इस पावन महीने में श्रद्धालु 33 मालपुए बनाकर उन्हें कांस्य की कटोरी में खीर और स्वर्ण के साथ दान करते हैं. मान्यता है कि यह दान अगर ब्राह्मण, मंदिर में भगवान विष्णु के चरणों में या फिर दामाद को श्रद्धापूर्वक दिया जाए, तो भगवान विष्णु प्रसन्न होकर भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
    मलमास का दामाद से है क्या कनेक्शन
    ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है, क्योंकि यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में दामाद को भी भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है. विवाह संस्कार के समय जब कन्यादान किया जाता है, तब मंत्रों में ‘विष्णु स्वरूपाय वराय’ शब्द बोले जाते हैं. इसका अर्थ है कि लक्ष्मी स्वरूप कन्या को विष्णु रूपी वर को समर्पित किया जा रहा है. यही वजह है कि घर के दामाद को विशेष सम्मान दिया जाता है. मान्यता है कि अधिक मास में दामाद को मालपुआ, सोना और अन्य वस्तुओं का दान करने से भगवान विष्णु को दान देने के समान पुण्य प्राप्त होता है.

    क्या होता है अधिक मास
    हिंदू पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर की जाती है. सूर्य वर्ष लगभग 365 दिन 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का माना जाता है. ऐसे में दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. यही अंतर तीन वर्षों में बढ़कर लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है. इस असमानता को दूर करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है. इसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है.

    ज्योतिषाचार्य ओम तिवारी बताते हैं कि इस बार करीब आठ साल बाद ज्येष्ठ मास में अधिक मास का संयोग बना है. इससे पहले साल 2018 में ज्येष्ठ मास, 2020 में आश्विन मास और 2023 में श्रावण मास में अधिक मास पड़ा था. वहीं, अगला अधिक मास वर्ष 2029 में चैत्र मास के दौरान आएगा.

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