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    राजधानी में ट्रांसपोर्ट पर ब्रेक! ड्राइवरों की 3 दिन की हड़ताल शुरू

    नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में आज से कमर्शियल (वाणिज्यिक) गाड़ियों के पहिए थमने जा रहे हैं। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कमर्शियल वाहन चालकों के यूनियन ने आज से तीन दिनों की हड़ताल पर जाने का बड़ा ऐलान किया है। टैक्सी ड्राइवरों का कहना है कि लगातार बढ़ती तेल की कीमतों की वजह से उनका गुजारा मुश्किल हो गया है, इसलिए किराये में भी बढ़ोतरी की जानी चाहिए। ड्राइवरों ने सरकार से मांग की है कि टैक्सी चालकों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए कड़े नियम और नीतियां बनाई जाएं। इस हड़ताल की वजह से आज दिल्ली में आम जनता को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

    तीन दिनों तक थमेंगे ऑटो और टैक्सियों के पहिए

    कमर्शियल गाड़ी के ड्राइवरों ने दो दिन पहले ही इस हड़ताल की चेतावनी दे दी थी, जिसके मुताबिक दिल्ली में वाणिज्यिक वाहन चालक 21 से 23 मई तक पूरी तरह हड़ताल पर रहेंगे। ड्राइवरों का साफ कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले समय में एक बड़ा और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस तीन दिवसीय हड़ताल में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के साथ-साथ गिग वर्कर्स (ऑनलाइन डिलीवरी और राइडिंग ऐप से जुड़े लोग) भी शामिल हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पंजीकृत करीब 70 हजार टैक्सियां, ऑटो और छोटे-बड़े ट्रक इस हड़ताल का हिस्सा हैं, जिससे न सिर्फ यात्रियों को परेशानी होगी बल्कि फल, सब्जी और रोजमर्रा के जरूरी सामानों की सप्लाई पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इस सिलसिले में टैक्सी यूनियनों ने दिल्ली के एलजी तरणजीत सिंह सिंधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर अपनी मांगें पहले ही सौंप दी हैं।

    कम किराए के खिलाफ ड्राइवरों का फूटा गुस्सा

    इस हड़ताल में शामिल एक टैक्सी ड्राइवर नरेंद्र तिवारी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि इस समय चालकों के हालात बेहद खराब हैं क्योंकि कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला किराया बहुत कम कर दिया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि रैपिडो कंपनी पहले प्रति किलोमीटर के हिसाब से जो भुगतान कर रही थी, उसमें अब भारी कटौती कर दी गई है जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। इसी कम किराए और शोषण के विरोध में सभी ड्राइवर एकजुट होकर 21 से 23 मई तक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और अब देखना होगा कि सरकार और कंपनियों की तरफ से इस पर क्या कदम उठाया जाता है।

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