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    अस्पताल की चूक: बच्ची को मिला गलत खून, ICU में भर्ती

    पाली। शहर के बांगड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल से लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ ब्लड बैंक और अस्पताल स्टाफ की भारी चूक के कारण थैलेसीमिया से पीड़ित एक 5 वर्षीय मासूम बच्ची को गलत ग्रुप का रक्त चढ़ा दिया गया। बच्ची का असली ब्लड ग्रुप 'ओ पॉजिटिव' (O+) था, लेकिन उसे 'बी पॉजिटिव' (B+) खून दे दिया गया। रक्त चढ़ते ही जब बच्ची की हालत बिगड़ने लगी, तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में खून चढ़ाना बंद कर मासूम को पेरिअट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) वार्ड में वेंटिलेशन और डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती कराया गया है।


    तबीयत बिगड़ते ही खुली पोल, हर 20 दिन में चढ़ता था खून

    पीड़ित बच्ची ध्रुवी (5 वर्ष) के पिता अनिरुद्ध वैष्णव ने बताया कि उनकी बेटी थैलेसीमिया से पीड़ित है और पिछले एक साल से उसे हर 20 दिन में खून चढ़ाने के लिए बांगड़ अस्पताल लाया जाता है। बुधवार को ध्रुवी की मां दिशा वैष्णव और मामा महेश उसे लेकर अस्पताल पहुंचे थे। थैलेसीमिया वार्ड में जैसे ही खून चढ़ना शुरू हुआ, मासूम ने सिर और पैरों में तेज दर्द की शिकायत की। जब परिजनों और ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने ब्लड बैग पर लगी पर्ची देखी, तो उस पर 'बी पॉजिटिव' लिखा हुआ था, जिसके बाद तुरंत प्रक्रिया को रोका गया।

    ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में ही दर्ज था गलत ग्रुप, परिजनों को नहीं मिला जवाब

    इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि ब्लड बैंक द्वारा तैयार किए गए फॉर्म में ही बच्ची का ब्लड ग्रुप गलत यानी 'बी पॉजिटिव' दर्ज कर दिया गया था। जब बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद लैब से दोबारा जांच कराई गई, तो उसका सही ग्रुप 'ओ पॉजिटिव' निकल कर सामने आया। घटना के बाद जब सहमे हुए परिजन जवाब मांगने ब्लड बैंक पहुंचे, तो वहां मौजूद स्टाफ ने जिम्मेदारी लेने के बजाय उन्हें जांच की बात कहकर टाल दिया।

    एक्सपर्ट की राय: गलत ब्लड ग्रुप चढ़ने से जा सकती है जान

    अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. एच.एम. चौधरी ने इस लापरवाही को जानलेवा बताते हुए कहा कि गलत ग्रुप का खून चढ़ने से शरीर में गंभीर एलर्जी रिएक्शन (Allergic Reaction) हो सकता है, जो मामूली से शुरू होकर मेजर शॉक में बदल जाता है। इसके कारण मरीज के गुर्दे (Kidneys) फेल हो सकते हैं और समय पर इलाज न मिलने से जान भी जा सकती है। उन्होंने बताया कि खून चढ़ाने से पहले हमेशा क्रॉस-मैचिंग और माइनर ब्लड कंटेंट का मिलान करना अनिवार्य होता है।

    तीन डॉक्टरों की टीम तैनात, अस्पताल प्रशासन ने बैठाई जांच

    मामले की गंभीरता को देखते हुए बांगड़ चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. कैलाश परिहार ने तुरंत एक्शन लिया है। उन्होंने बताया कि बच्ची की सेहत पर नजर रखने और उसका उचित उपचार करने के लिए तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों (डॉ. निधि कौशल, डॉ. अनिशा मीणा और डॉ. एस.एन. स्वर्णकार) की विशेष टीम नियुक्त की गई है। फिलहाल बच्ची डॉक्टरों की बातचीत कर रही है और स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर उसे 24 घंटे के लिए ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। साथ ही, इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार दोषियों का पता लगाने के लिए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है।

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