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    AIMIM ने बिहार में सभी प्रकोष्ठ भंग किए, नया संगठन 5 जून तक तैयार

    पटना। बिहार के सियासी हलकों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है। पार्टी आलाकमान ने बड़ा फैसला लेते हुए अपनी बिहार प्रदेश इकाई के अंतर्गत आने वाले सभी प्रकोष्ठों (विंग्स और सेल) को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की अनुशंसा और सीधे निर्देश पर अमल में लाई गई है।

    संगठन को धारदार बनाने की कवायद; नए चेहरों को आगे लाने की तैयारी

    पार्टी की ओर से इस निर्णय को लेकर आधिकारिक तौर पर एक पत्र जारी किया गया है, जिस पर एआईएमआईएम बिहार के संयुक्त सचिव इश्तियाक अहमद के हस्ताक्षर हैं। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सूबे में संगठन के ढांचे को पहले से अधिक सक्रिय, मजबूत और धारदार बनाने के इरादे से यह ढांचागत बदलाव किया गया है। इस कदम के जरिए आने वाले समय में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मठ, ऊर्जावान और युवा कार्यकर्ताओं को आगे आने तथा संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का बड़ा अवसर मिलेगा।

    5 जून तक पूरी होगी पुनर्गठन की प्रक्रिया; सभी पद हुए खाली

    पार्टी द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, भंग किए गए इन सभी प्रकोष्ठों को दोबारा नए सिरे से गठित करने का लक्ष्य 5 जून तक तय किया गया है। इस आदेश के सामने आने के बाद बिहार में पार्टी के सभी विंग्स के पदाधिकारियों के पद तत्काल प्रभाव से खाली मान लिए गए हैं। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने इस संगठनात्मक बदलाव की पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा और समर्पण रखने वाले नेताओं को जल्द ही नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी, ताकि जमीनी पकड़ को और पुख्ता किया जा सके।

    सीमांचल में मजबूत पकड़; पिछले चुनावों में पार्टी ने चौंकाया था

    गौरतलब है कि बिहार की राजनीति में एआईएमआईएम एक महत्वपूर्ण ताकत बनकर उभरी थी, जब पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी ने सबको चौंकाते हुए पांच सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी। विशेषकर बिहार के सीमांचल (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया) क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन बेहद दमदार रहा था, जहाँ कई विधानसभा सीटों पर एआईएमआईएम, एनडीए और महागठबंधन के बीच त्रिकोणीय और कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। चुनावी सफलताओं के बाद राज्य इकाई में यह अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल माना जा रहा है।

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