सरकार की प्राथमिकता में ऑक्शन खानें, माइंस विभाग ने परिचालन प्रक्रिया तेज करने पर दिया जोर
जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम श्रीमती अपर्णा अरोरा ने कहा कि ऑक्शन खानों को शीघ्र परिचालन में लाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए मेजर एवं माइनर मिनरल के प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों और प्लॉटों के ऑक्शन पर विशेष जोर दिया जाएगा।
श्रीमती अरोरा शुक्रवार को सचिवालय के मंथन कक्ष में खान एवं भूविज्ञान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मिनरल ब्लॉकों के ऑक्शन के बाद परिचालन में आने तक की 18 माह की समय सीमा को कम करने के प्रयास किए जाएंगे। साथ ही एलओआई जारी करने की 45 दिन की समय सीमा में भी आवश्यक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रिफर बीडर्स को भी आगे आकर आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं समय पर पूरी करनी होंगी, ताकि खनन कार्य शीघ्र शुरू हो सके। विभागीय प्रक्रियाओं में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जानकारी दी गई कि इस वित्तीय वर्ष में 20 मेजर मिनरल ब्लॉक और करीब 100 माइनर मिनरल प्लॉट प्री-एम्बेडेड स्वरूप में तैयार किए जाएंगे। एसीएस माइंस ने कहा कि मेजर मिनरल ब्लॉकों के ऑक्शन में राजस्थान देशभर में अग्रणी राज्य है और प्री-एम्बेडेड के 8 ब्लॉकों के ऑक्शन में भी राज्य शीर्ष पर रहा है।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा माइनिंग प्लान अनुमोदन एवं पर्यावरण स्वीकृतियों सहित आवश्यक अनुमति पहले से प्राप्त कर ऑक्शन किए जाने से खनन कार्य जल्द शुरू हो सकता है, जिससे निवेश, रोजगार और राजस्व के नए अवसर विकसित होंगे।
सीमावर्ती जिलों में अवैध खनिज परिवहन रोकने के लिए भी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। श्रीमती अरोरा ने कहा कि राज्य एवं राष्ट्रीय राजमार्गों से बजरी और अन्य खनिजों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी रखी जाए तथा संबंधित अधिकारी फील्ड में अधिक सतर्क रहें।
बैठक में तुलाई कांटों एवं वीटीएस ऑटोमाइजेशन शिविरों की प्रगति की समीक्षा भी की गई। विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि ने बताया कि विभाग द्वारा वीटीएस इंस्टॉलेशन अभियान जारी है और अप्रैल माह में 9 मेजर मिनरल ब्लॉकों का ऑक्शन किया जा चुका है।
निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा ने बताया कि विभाग द्वारा जारी वार्षिक कैलेंडर के अनुसार सभी कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
बैठक में अतिरिक्त निदेशक माइंस मुख्यालय महेश माथुर, अतिरिक्त निदेशक भूविज्ञान आलोक प्रकाश जैन, अतिरिक्त निदेशक आईटी शीतल अग्रवाल सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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