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    जोधपुर का गौरव बढ़ा: मण्डोर केन्द्र बना देश का नंबर-1 तिल अनुसंधान केंद्र

    राष्ट्रीय सम्मान से चमका जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय, वैज्ञानिकों की मेहनत को मिला बड़ा पुरस्कार

    जोधपुर। कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के अंतर्गत संचालित डॉ. बी. आर. चौधरी कृषि अनुसंधान केन्द्र, मण्डोर ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2025 का “सर्वश्रेष्ठ ए.आई.सी.आर.पी. तिल केन्द्र पुरस्कार” प्राप्त किया है। इस सम्मान के साथ राजस्थान का मान पूरे देश में बढ़ा है।

    यह प्रतिष्ठित पुरस्कार आईसीएआर-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान एवं अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) तिल एवं रामतिल, जबलपुर द्वारा प्रदान किया गया। सम्मान वर्चुअल वार्षिक समूह बैठक के समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. संजीव गुप्ता, सहायक महानिदेशक डॉ. एस.के. झा, निदेशक डॉ. आर.के. माथुर तथा परियोजना समन्वयक डॉ. आनंद कुमार विश्वकर्मा द्वारा दिया गया।

    कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरु प्रो. वी.एस. जैतावत ने बताया कि तिल देश की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है और भारत विश्व में इसके उत्पादन व क्षेत्रफल के मामले में अग्रणी देशों में आता है। इसके बावजूद औसत उत्पादकता अभी भी अपेक्षाकृत कम है, जिसे बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक लगातार अनुसंधान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेष कार्य किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में देश में लगभग 15.2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिल की खेती हुई, जिससे करीब 8.2 लाख टन उत्पादन प्राप्त हुआ। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में इसकी खेती बड़े स्तर पर की जाती है।

    अनुसंधान निदेशक डॉ. एम.एम. सुन्दरिया ने बताया कि मण्डोर केन्द्र की स्थापना वर्ष 1983 में हुई थी और तब से वैज्ञानिक किसानों के हित में लगातार अनुसंधान कार्य कर रहे हैं। केन्द्र अब तक तिल की 9 उन्नत किस्में विकसित कर चुका है। इनमें RT-392 किस्म किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हुई है। इसके अलावा फसल उत्पादन और संरक्षण की आधुनिक तकनीकों का भी सफल विकास किया गया है।

    क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. एम.एल. मेहरिया ने बताया कि देशभर में आईसीएआर की तिल परियोजना के तहत 12 नियमित और 16 स्वैच्छिक अनुसंधान केन्द्र कार्यरत हैं। इन केन्द्रों का मूल्यांकन उन्नत किस्मों के विकास, उत्पादन तकनीक, बजट उपयोग और समयबद्ध रिपोर्टिंग जैसे विभिन्न मानकों पर किया जाता है। मण्डोर केन्द्र ने सभी मापदण्डों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह सम्मान हासिल किया।

    इस उपलब्धि पर कुलगुरु प्रो. जैतावत ने केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान विश्वविद्यालय की मजबूत अनुसंधान परंपरा और किसानों के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. एस.आर. कुम्हार, डॉ. राकेश चौधरी, डॉ. दान सिंह जाखड़, डॉ. नीलम गेट, डॉ. शालिनी पांडेय सहित अन्य कर्मचारियों के योगदान की सराहना की।

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