दरभंगा। मिथिलांचल के लोगों और मैथिली भाषा प्रेमियों के लिए एक बेहद गौरवशाली और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने स्कूली पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने इस ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी स्थानीय सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर को एक पत्र भेजकर दी है। सरकार के इस कदम से मिथिला क्षेत्र में हर्ष का माहौल है और इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक और भाषाई विरासत की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर की पहल और नई शिक्षा नीति का असर
केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अपने पत्र में बताया कि सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर द्वारा संसद और सरकार के समक्ष मैथिली भाषा को सीबीएसई में शामिल करने की मांग को शिक्षा मंत्रालय ने बेहद गंभीरता से लिया था। इस विषय पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) से विस्तृत समीक्षा कराई गई। समीक्षा में पाया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्राथमिक स्तर (कक्षा 5 और संभव हो तो कक्षा 8) तक के छात्र-छात्राओं को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने की पुरजोर वकालत की गई है, जिसके बाद यह रास्ता साफ हुआ।
सत्र 2026-27 से लागू होगा सिलेबस, वेबसाइट पर पाठ्यक्रम उपलब्ध
सीबीएसई की ओर से साझा की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर (Secondary Level) पर मैथिली विषय को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना दिया गया है। बोर्ड ने छात्रों और शिक्षकों की सुविधा के लिए मैथिली भाषा का पूरा सिलेबस और पाठ्य-सामग्री अपनी आधिकारिक अकादमिक वेबसाइट पर भी लाइव (अपलोड) कर दी है। इसके साथ ही, एनसीईआरटी ने मैथिली सहित देश की प्रमुख भाषाओं में 'प्राइमर' (शुरुआती पाठ्यपुस्तकें) भी विकसित कर लिए हैं।
संविधान की 8वीं अनुसूची का मान, 121 भारतीय भाषाओं में अनुवाद का काम जारी
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि मैथिली भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल देश की 22 प्रतिष्ठित भाषाओं में से एक है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (School Education) 2023 के तहत देश की 121 भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में अब अन्य विषयों की मुख्य पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद भी मैथिली भाषा में कराया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में मिथिलांचल के बच्चे अपनी ही भाषा में विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय आसानी से पढ़ सकेंगे।
भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा ने जताई खुशी, कहा— "मातृभाषा और विरासत को मिली नई पहचान"
इस ऐतिहासिक फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और राज्य मंत्री जयंत चौधरी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय हमारी मातृभाषा, संस्कृति और समृद्ध विरासत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान देने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा बिहार की लोक संस्कृति और भाषाओं का सम्मान किया है। अब हमारी नई पीढ़ी अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपरा से और अधिक मजबूती से जुड़ पाएगी।


