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    पाकिस्तान में बढ़ा आर्थिक संकट, ईंधन के बाद अब आटे की किल्लत से जनता परेशान

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। देश की जनता पर एक तरफ खाने का संकट मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की किल्लत हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और आंतरिक नीतियों की विफलता के कारण देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

    नता पर खाद्य और ईंधन की दोहरी मार

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे पाकिस्तान में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की भारी कमी हो गई है। वहीं दूसरी तरफ, देश के भीतर गेहूं की नई फसल उम्मीद के मुताबिक न होने से अब आटे का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

    जमाखोरों के खिलाफ मरियम नवाज सख्त

    इस बदहाली को देखते हुए पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने जमाखोरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आदेश दिया है कि:

    • जिन भी व्यापारियों के पास गेहूं का स्टॉक है, वे दो हफ्ते के भीतर उसका पूरा ब्योरा सरकार को सौंपें।

    • ऐसा न करने वाले जमाखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    • सरकार को डर है कि इस कमी का फायदा उठाकर आने वाले दिनों में आटे की कीमतें बेलगाम हो सकती हैं।

    फसल की कटाई के तुरंत बाद क्यों गहराया संकट?

    सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह संकट मार्च और अप्रैल के महीनों में गेहूं की नई फसल की कटाई पूरी होने के तुरंत बाद पैदा हुआ है।

    • पंजाब कृषि विभाग के मुताबिक, इस बार औसतन करीब 33 मन प्रति एकड़ गेहूं का उत्पादन हुआ है।

    • आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस साल गेहूं की कुल पैदावार देश की सालाना जरूरत से 20 फीसदी से भी ज्यादा कम रह सकती है।

    • रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के तनाव के कारण वैश्विक अनाज बाजार पहले से अस्थिर है, जिससे पाकिस्तान के पास बाहर से अनाज मंगाने के विकल्प भी सीमित हैं।

    किसान संगठन का गुस्सा: 'पाकिस्तान किसान इत्तेहाद' के अध्यक्ष खालिद खोखर ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब किसान बेहद कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर थे, तब प्रशासनिक तंत्र सोया हुआ था और अब जब कीमतें बढ़ने लगी हैं, तो छापेमारी की नौटंकी की जा रही है।

    इस महासंकट के मुख्य कारण क्या हैं?

    पाकिस्तान के इस कृषि संकट के लिए मुख्य रूप से वहां की नीतियां और खराब बुनियादी ढांचा जिम्मेदार हैं:

    • खेती की बदहाली: देश में आधुनिक सिंचाई व्यवस्था नहीं है, नहरें पुरानी और गाद (मिट्टी) से भरी हैं, और जमीन के पानी (Ground Water) का स्तर लगातार गिर रहा है।

    • महंगी लागत: खाद, डीजल, बिजली और मजदूरी की बढ़ती लागत के कारण अब किसानों के लिए गेहूं उगाना पूरी तरह से घाटे का सौदा बन चुका है।

    • नीतियों में अस्थिरता: आटा मिल उद्योग ने सरकार की अस्थिर नीतियों, फाइनेंसिंग में देरी और गोदामों पर बेवजह की छापेमारी को बाजार का भरोसा तोड़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

    दोगुना हुआ तेल का बिल, खाली हुआ खजाना

    पाकिस्तान की यह मुश्किल सिर्फ रसोई के बजट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते वैश्विक तेल बाजार में आए उछाल ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को खाली करना शुरू कर दिया है।

    • पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल जो पहले करीब 30 करोड़ डॉलर हुआ करता था, वह अब बढ़कर 60 से 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है।

    • तेल खरीदने का खर्च लगभग दोगुना हो जाने से देश का खजाना खाली हो रहा है, जिससे आने वाले दिनों में आम जनता की मुश्किलें और बढ़ने की पूरी आशंका है।

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