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    मेले की रौनक में आग का कहर, होटल में लगी भीषण लपटें

    सीकर/खाटूश्यामजी। राजस्थान के सुप्रसिद्ध और आस्था के बड़े केंद्र बाबा खाटूश्यामजी के धाम से एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। यहाँ आयोजित होने वाले पवित्र शुक्ल पक्ष एकादशी मेले के लिए देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ रहा है। पूरा कस्बा श्याम बाबा के जयकारों से गूंज रहा है, लेकिन इसी बीच मुख्य बाजार के पास स्थित होटल 'राधे की हवेली' की ऊपरी मंजिल से अचानक आग की ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार उठने लगा। अज्ञात कारणों से लगी इस भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के रिहायशी और व्यापारिक इलाके में हड़कंप मच गया और लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

    संकरे रास्ते और अतिक्रमण बने आफत, स्थानीय युवाओं ने संभाला मोर्चा

    आग की सूचना मिलते ही श्री श्याम मंदिर कमेटी और नगर पालिका प्रशासन ने तुरंत दमकल गाड़ियों को रवाना किया। प्रशासन के पास आधुनिक दमकलें तो मौजूद हैं, लेकिन मुख्य बाजार के संकरे रास्तों और स्थायी-अस्थायी अतिक्रमण के कारण करोड़ों रुपये की ये गाड़ियां तंग गलियों के मोड़ों पर ही फंस गईं और समय पर होटल के मुख्य गेट तक नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में स्थानीय निवासियों, होटल स्टाफ और खाटूश्यामजी के जांबाज युवाओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी के टैंकरों की मदद से मोर्चा संभाला। दमकलकर्मियों ने भी सूझबूझ दिखाते हुए लंबी दूरी तक पाइप फैलाए और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। गनीमत रही कि होटल में फंसे स्टाफ और श्रद्धालुओं को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    प्रशासनिक अनदेखी पर उठे सवाल, हाईकोर्ट के आदेश भी नजरअंदाज

    इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन की गंभीर लापरवाही और आपराधिक अनदेखी को उजागर कर दिया है। लगातार दी जा रही चेतावनियों के बावजूद अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को सुचारू करने पर ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इसी साल 16 जनवरी 2026 को एक सख्त आदेश जारी किया था। अदालत ने मुख्य मंदिर मार्ग, प्रवेश और निकास रास्तों से हर तरह का अतिक्रमण हटाने और सड़कों को चौड़ा करने का निर्देश दिया था ताकि आपातकाल में एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड आसानी से पहुंच सकें, लेकिन प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

    13 साल पुराने खौफनाक अग्निकांड की ताजा हुईं यादें

    होटल 'राधे की हवेली' की इस घटना ने स्थानीय लोगों को 26 मार्च 2013 के उस काले अतीत की याद दिला दी, जिसने पूरे सीकर जिले को झकझोर दिया था। उस दौरान कबूतर चौक में लगी भयानक आग में संकरी गलियों के कारण दमकलें मौके पर नहीं पहुंच पाई थीं, जिसके चलते तीन स्थानीय दुकानदार जिंदा जल गए थे और करोड़ों का माल स्वाहा हो गया था। इतने साल बीत जाने के बाद भी जमीनी हालात में कोई खास सुधार नहीं देखने को मिला है।

    भविष्य के लिए अब 'स्मार्ट सिटी' और 'दमकल बाइक' का प्लान

    इस हादसे के बाद जब प्रशासनिक विफलता पर तीखे सवाल उठने लगे, तो नगर पालिका खाटूश्यामजी के अधिशासी अधिकारी (EO) ओमप्रकाश चौधरी ने कमियों को स्वीकार करते हुए एक नया एक्शन प्लान सामने रखा है। उन्होंने बताया कि अब 'स्मार्ट सिटी योजना' के तहत मुख्य बाजार के नीचे हाई-प्रेशर पानी की पाइपलाइन बिछाई जाएगी और जगह-जगह फायर हाइड्रेंट लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, कस्बे की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मंदिर कमेटी और एसडीएम से विशेष रूप से छोटे दमकल वाहन (मिनी फायर टेंडर्स) और संकरी गलियों में तेजी से जाने वाली 'फायर बाइक्स' उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।

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