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    टीएमसी में अंदरूनी कलह तेज, दो कद्दावर पार्षदों के इस्तीफे से मचा हड़कंप

    कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में मचे आंतरिक घमासान और सांगठनिक संकट ने अब एक नया रूप ले लिया है. पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले शहरी निकायों और नगर निगमों में पार्षदों के बीच असंतोष की आग इस कदर भड़क चुकी है कि कोलकाता नगर निगम के दो बेहद वरिष्ठ और प्रभावशाली पार्षदों, सुशांत घोष और अरूप चक्रवर्ती ने अपने प्रशासनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है. सुशांत घोष ने प्रशासनिक समिति (बोरो-12) के अध्यक्ष पद से और अरूप चक्रवर्ती ने नगर निगम की लेखा समिति (अकाउंट्स कमेटी) के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देकर पार्टी के भीतर बड़ी बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिससे टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं.

    शीर्ष नेतृत्व पर तीखे प्रहार और मंत्रियों के भूमिगत होने के आरोप

    अपने पदों से इस्तीफा देने के तुरंत बाद दोनों नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस की कार्यप्रणाली और उसके शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया. अरूप चक्रवर्ती ने स्पष्ट रूप से कहा कि लोकतंत्र में हार को सहजता से स्वीकार किया जाना चाहिए और यदि दल अपनी कमियों को नहीं मानेगा, तो पुरानी जीतों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. उनके इस बयान को सीधे शीर्ष नेतृत्व के अहंकार पर चोट माना जा रहा है. दोनों पार्षदों ने आरोप लगाया कि चुनाव नतीजों के बाद पार्टी के वरिष्ठ मंत्री और कद्दावर नेता पूरी तरह भूमिगत (लापता) हो गए हैं और उन्होंने संकट के समय आम कार्यकर्ताओं व पार्षदों से पूरी तरह दूरी बना ली है. चक्रवर्ती ने यहाँ तक कहा कि पिछले कई सालों से सामान्य कार्यकर्ताओं की पहुंच मुख्यमंत्री तक नहीं होने दी गई, क्योंकि उनके आस-पास रहने वाले कुछ चुनिंदा लोगों ने एक अभेद्य दीवार खड़ी कर रखी थी.

    भाजपा सरकार की सराहना और पाला बदलने की अटकलें

    इन दोनों बड़े नेताओं ने चुनाव के बाद हुई हिंसा के दौरान विस्थापित हुए अपने समर्थकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की खुले मंच से सराहना की है, जिसके बाद से दोनों के जल्द ही पाला बदलने की राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं. इसके अलावा, सुशांत घोष ने अपने ऊपर हुए एक पुराने जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए राज्य की पुलिस जांच पर साफ अविश्वास जताया और सूबे के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से इस मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर दी है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.

    भवानीपुर किले में ढहती टीएमसी और 60 से अधिक पार्षदों का इस्तीफा

    शहरी क्षेत्रों में बगावत का यह सिलसिला कुछ दिन पहले ही शुरू हो गया था, जब पार्षद देबोलीना बिस्वास ने भवानीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. भवानीपुर को कभी टीएमसी का सबसे सुरक्षित किला माना जाता था, जहाँ पार्टी की इस दुर्दशा ने अंदरूनी कलह को और हवा दे दी है. इसके साथ ही वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने भी अपने सभी सांगठनिक पद छोड़ दिए हैं और कई विधायक व सांसद लगातार बैठकों से दूरी बना रहे हैं.

    सूत्रों के मुताबिक, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से अब तक विभिन्न नगरपालिकाओं में लगभग 60 से अधिक तृणमूल कांग्रेस पार्षद अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं या सांगठनिक जिम्मेदारियों से पीछे हट गए हैं. कई पार्षदों ने नगर निगम कार्यालय आना भी बंद कर दिया है, जिससे आम जनता को मिलने वाली नागरिक सेवाओं पर बुरा असर पड़ने की आशंका है. विश्लेषकों का मानना है कि जो स्थानीय निकाय पिछले एक दशक तक टीएमसी की मुख्य रीढ़ थे, अब वही ढांचा ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है और पार्टी का यह संकट अब नियंत्रण से बाहर हो चुका है.

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