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    “वोटर लिस्ट के ‘विशेष पुनरीक्षण’ (SIR) से कांग्रेस की बढ़ी टेंशन; सीएम रेवंत रेड्डी बोले— ‘गरीबों और आदिवासियों के वोट कटने की आशंका'”

    हैदराबाद | तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जून महीने से प्रारंभ होने वाले 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान को लेकर कांग्रेस संगठन को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पार्टी के आलाकमान से कहा है कि प्रदेश की सभी 119 विधानसभा सीटों और 17 लोकसभा क्षेत्रों में तुरंत प्रभारियों की तैनाती की जाए। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनाव प्रक्रिया से पहले किसी भी योग्य और वास्तविक वोटर का नाम मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से कटने न पाए।

    पीएसी की बैठक में वंचित वर्गों के वोटों पर चिंता

    शुक्रवार को आयोजित कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) की महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आशंका जताई कि इस पुनरीक्षण अभियान के दौरान समाज के कई वर्गों को वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से लंबाडा समुदाय, आदिवासी आबादी और दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भौगोलिक और सामाजिक कारणों से इन विशिष्ट वर्गों के लोगों के नाम मतदाता सूची से छूटने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।

    प्रभारियों को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने की सलाह

    सीएम रेवंत रेड्डी ने संगठन को आगाह करते हुए कहा कि रोजगार और आजीविका की तलाश में राज्य के अनेक विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिक दूसरे शहरों या राज्यों में पलायन कर चुके हैं। ऐसे में उनके नामों को सूची से हटाए जाने का अंदेशा बना रहता है। इसके साथ ही उन्होंने दलित, अल्पसंख्यक और महिला मतदाताओं के वोटों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने नवनियुक्त प्रभारियों को हिदायत दी कि वे केवल कागजी कार्रवाई न करें, बल्कि लगातार अपने आवंटित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हकीकत और मतदाता सूची की गड़बड़ियों पर पैनी नजर रखें।

    मंत्रियों को संगठन के लिए वक्त निकालने के कड़े निर्देश

    पार्टी को मजबूत करने और अभियान को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने जिला प्रभारियों की जिम्मेदारी संभाल रहे कैबिनेट मंत्रियों को भी कड़ा टास्क दिया है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि वे हर दस दिन में कम से कम एक पूरा दिन अनिवार्य रूप से संगठन के कामकाज और कार्यकर्ताओं की समस्याओं के लिए निकालें। सीएम ने घोषणा की कि वे स्वयं भी हर दस दिन में ग्राम स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे और महीने में तीन दिन पूरी तरह से सांगठनिक गतिविधियों के लिए आरक्षित रखेंगे। उन्होंने अंत में दोहराया कि कांग्रेस को संभावित तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों का पहले से ही अनुमान होना चाहिए ताकि आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।

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