हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक विसंगति उजागर हुई है। एक तरफ जहां सुदूर ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूल स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं और वहां महज एक शिक्षक पर 50 से 60 बच्चों को पढ़ाने का भारी बोझ है, वहीं दूसरी तरफ शहरी क्षेत्र के 'सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' में 7 से 12 छात्र-छात्राओं पर एक शिक्षक ऐश कर रहे हैं। शिक्षा विभाग का यह रवैया सरकार के उस अधिकारिक नियम की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है, जिसके तहत अनिवार्य रूप से प्रति 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की नियुक्ति का मानक तय किया गया है।
एक्सीलेंस स्कूल में जरूरत से ज्यादा स्टाफ, भूगोल में चौथे शिक्षक की एंट्री
जिले में सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र 'गवर्नमेंट गर्ल्स प्लस टू उच्च विद्यालय' (सीएम उत्कृष्ट बालिका विद्यालय) बना हुआ है। इस प्रतिष्ठित संस्थान में वर्तमान में कुल 308 छात्राएं ही पढ़ रही हैं, लेकिन उनके लिए 43 शिक्षकों का भारी-भरकम स्टाफ तैनात है। इस गणित के हिसाब से यहां महज 7 छात्राओं पर एक गुरुजी उपलब्ध हैं। हद तो तब हो गई जब पहले से ही भूगोल विषय के तीन शिक्षक मौजूद होने के बाद भी हाल ही में अंतर जिला स्थानांतरण के जरिए जागेश्वर प्रसाद को चौथे भूगोल शिक्षक के रूप में यहां भेज दिया गया। इससे पहले मई महीने में अनिल कुमार का भी इसी स्कूल में ट्रांसफर किया गया था। विषयवार शिक्षकों की इस अति-तैनाती ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहरी स्कूलों में शिक्षकों की 'मौज', ग्रामीण अंचल राम भरोसे
विभाग के अंदरूनी सूत्रों का संगीन आरोप है कि शहर के सुविधायुक्त और नामचीन स्कूलों में मलाईदार पोस्टिंग और प्रतिनियुक्ति पाने के लिए ऊंचे रसूख और अनुचित तौर-तरीकों का खेल खेला जाता है। यही कारण है कि श्रीकृष्ण आरक्षी उच्च विद्यालय में 12 छात्रों पर और उत्क्रमित उच्च विद्यालय सिंदूर में भी 12 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। इसके विपरीत, जिले के देहाती इलाकों की तस्वीर बेहद चिंताजनक है। वहां कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में सालों से पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण एक ही शिक्षक को मजबूरी में सारे विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं और बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है।
मामला तूल पकड़ने पर उपायुक्त ने बुलाई रिपोर्ट, रैशनलाइजेशन की मांग
शिक्षा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यदि विभाग ईमानदारी से शिक्षकों का 'रैशनलाइजेशन' (युक्तिकरण) कर दे, तो ग्रामीण क्षेत्रों का संकट तुरंत खत्म हो सकता है। इस पूरे मामले की गूंज जब प्रशासनिक गलियारों में सुनाई दी, तो हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने शिक्षा विभाग के आला अफसरों को कड़ी फटकार लगाते हुए सभी स्कूलों के छात्र-शिक्षक अनुपात की वास्तविक रिपोर्ट तलब की है। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया है कि रिपोर्ट सामने आते ही गैर-जरूरी जगहों पर जमे शिक्षकों को हटाकर उन्हें कमी वाले स्कूलों में भेजा जाएगा ताकि हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।


