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    डीजल में गड़बड़ी का आरोप, 50 लीटर की टंकी में 60 लीटर भरने की शिकायत

    भोपाल: देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की आसमान छूती कीमतों के बीच अब पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और नापतोल में हेराफेरी के गंभीर मामले भी प्रकाश में आने लगे हैं। शहर के बैरियर क्षेत्र में स्थित 'सुभाष पेट्रोल पंप' पर एक वाहन मालिक ने डीजल भरवाने के दौरान घटतौली और तकनीकी अनियमितता का बड़ा आरोप लगाया है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।

    50 लीटर की टंकी और 60 लीटर का बिल!

    यह अजीबोगरीब मामला तब सामने आया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विद्युत विभाग के ठेकेदार राकेश परमार अपनी नई कार में ईंधन भरवाने के लिए सुभाष पेट्रोल पंप पहुंचे थे:

    • टंकी फुल करने का निर्देश: वाहन मालिक ने पेट्रोल पंप कर्मी को कार की डीजल टंकी पूरी तरह से फुल (Full) करने के लिए कहा।

    • चौंकाने वाला बिल: जब गाड़ी की टंकी फुल हुई, तो पंप कर्मचारी ने उन्हें 60 लीटर डीजल भरने का बिल थमा दिया। इस आंकड़े को देखकर वाहन मालिक के होश उड़ गए।

    वाहन मालिक ने उठाए गंभीर सवाल

    राकेश परमार ने बिल की राशि और डीजल की मात्रा पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पंप प्रबंधन के सामने शिकायत दर्ज कराई। उनके मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:

    • कंपनी की तय क्षमता: वाहन मालिक का कहना है कि कार निर्माता कंपनी के अनुसार उनकी नई कार के फ्यूल टैंक (ईंधन टंकी) की कुल अधिकतम क्षमता ही 50 लीटर है।

    • पहले से था रिजर्व ईंधन: कार पूरी तरह खाली नहीं थी, बल्कि उसमें पहले से ही रिजर्व कैटेगरी का कुछ ईंधन मौजूद था। ऐसे में 50 लीटर की क्षमता वाली टंकी में 60 लीटर डीजल भरा जाना व्यावहारिक और तकनीकी रूप से पूरी तरह नामुमकिन है।

    जब उन्होंने इस विसंगति को लेकर पेट्रोल पंप के मैनेजर से बात की, तो प्रबंधन की ओर से कोई भी संतोषजनक या स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।


    नापतोल विभाग और प्रशासन की बेरुखी पर फूटा गुस्सा

    पीड़ित उपभोक्ता का आरोप है कि जब उन्होंने मौके से ही इस धांधली की शिकायत दर्ज कराने के लिए नापतोल विभाग (Weight and Measures Department) के जिम्मेदार अफसरों और स्थानीय एसडीएम (SDM) कार्यालय के अधिकारियों को फोन मिलाया, तो किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने उनका फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।

    शिकायतकर्ता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिले में नापतोल विभाग केवल कागजों पर चल रहा है और फील्ड में उसकी कोई प्रभावी निगरानी या चेकिंग दिखाई नहीं देती, जिसके कारण आम जनता को लूटा जा रहा है।


    जनता ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

    इस घटना का वीडियो और खबर सोशल मीडिया पर आने के बाद क्षेत्र के अन्य वाहन स्वामियों में भी रोष व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:

    • उक्त पेट्रोल पंप की मशीनों की तुरंत औचक जांच (Surprise Inspection) की जाए।

    • यदि नापतोल की मशीनों में किसी भी तरह की चिप, सॉफ्टवेयर या तकनीकी छेड़छाड़ पाई जाती है, तो पंप का लाइसेंस तुरंत निरस्त कर संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो।

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