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    सुप्रीम कोर्ट ने अगस्थ्यमलई में अतिक्रमण पर कड़ा कदम उठाया, 118 अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और केरल में फैले अगस्थ्यामलई पारिस्थितिक परिदृश्य के संरक्षित वन क्षेत्रों में लंबे समय से जारी अतिक्रमण पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इसे पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा मानते हुए प्राथमिकता के आधार पर एक समयबद्ध अतिक्रमण हटाओ योजना तैयार कर उसे तुरंत लागू करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इस अवैध अतिक्रमण में शामिल पाए गए 118 सेवारत (वर्तमान) और सेवानिवृत्त (पूर्व) सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू करने के भी कड़े आदेश दिए हैं।

    दशकों पुराना अतिक्रमण और कोर्ट की नाराजगी

    न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कलाकड-मुंडनथुरई टाइगर रिजर्व, श्रीविल्लिपुथुर-मेघमलाई टाइगर रिजर्व और कन्याकुमारी वन्यजीव अभयारण्य सहित अगस्थ्यामलई के संरक्षित क्षेत्रों में दशकों से अवैध कब्जा जारी है। यह चिंताजनक स्थिति मद्रास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बनी हुई है, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।

    पर्यावरण संरक्षण राज्य का संवैधानिक दायित्व

    अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह मामला केवल प्रशासनिक जवाबदेही या कागजी नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर पर्यावरणीय शासन और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण से जुड़ा हुआ है। पीठ ने जोर देकर कहा कि राज्य का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के हित में नाजुक पारिस्थितिक क्षेत्रों और संकटग्रस्त वन्यजीवों की रक्षा सुनिश्चित करे। यह फैसला तमिलनाडु के आरक्षित वनों और बाघ अभयारण्यों के संरक्षण से जुड़ी एक याचिका पर सुनाया गया है।

    एक महीने में सौंपनी होगी विस्तृत योजना

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एक समयबद्ध और मंडल-वार अतिक्रमण निष्कासन योजना तैयार की जाए। इस योजना में स्पष्ट समय-सीमा, तय लक्ष्य और जिम्मेदार अधिकारियों के नाम दर्ज होने चाहिए, जिसे एक महीने के भीतर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के सामने पेश करना होगा। कोर्ट ने कहा कि इस योजना में केवल अतिक्रमण हटाना ही काफी नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर पुनर्वास, जानबूझकर नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई, खाली जमीन की पारिस्थितिक बहाली और यह सुनिश्चित करना भी शामिल होना चाहिए कि वहां दोबारा कब्जा न हो।

    दोषी कर्मचारियों पर गिरेगी गाज, लगेगा जुर्माना

    पीठ ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि 'तमिलनाडु सरकारी सेवक आचरण नियम, 1973' के तहत अतिक्रमणकारी पाए गए सभी 118 सरकारी कर्मचारियों पर तुरंत विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार को ऐसे मामलों में अतिरिक्त दंड लगाने पर विचार करने को कहा है, ताकि दोषी व्यक्तियों से पर्यावरण को पहुंचे नुकसान की भरपाई कराई जा सके और इसके लिए उनसे मिलने वाला शुल्क तमिलनाडु 'कैम्पा' (CAMPA) फंड में जमा कराया जाए।

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