नई दिल्ली | भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस ब्रीफिंग में देश की विदेश नीति और कई अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का बहुप्रतीक्षित भारत दौरा अब 3 से 7 जून के बीच पुनर्निर्धारित किया गया है। इससे पहले वे 1 जून को अंतरराष्ट्रीय बिग कैट्स गठबंधन सम्मेलन का हिस्सा बनने वाली थीं, लेकिन अपरिहार्य कारणों से उस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति का यह छठा भारत दौरा होगा, जिसमें दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रगाढ़ता को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति का दौरा, पीएम मोदी के साथ इन 7 अहम क्षेत्रों पर होगी बात
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ उनके देश का एक उच्च स्तरीय मंत्री-मंडल भी भारत आ रहा है। इस यात्रा के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इस शिखर बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच ऊर्जा (क्रूड ऑयल), व्यापारिक लेन-देन, वित्तीय निवेश, फार्मास्यूटिकल्स (दवा निर्माण), जन-स्वास्थ्य, परिवहन नेटवर्क और रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) जैसे 7 प्रमुख क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करना है। कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस यात्रा से भारत-वेनेजुएला संबंधों के बीच आर्थिक सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होगा।
भारत-नेपाल सीमा का 98% हिस्सा तय, रबी लामिछाने के दौरे के बीच तीसरे देश को कड़ा संदेश
पड़ोसी देश नेपाल के साथ चल रहे सीमा मुद्दों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बेहद स्पष्ट रूप से भारत का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भारत और नेपाल की भौगोलिक सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा आपसी सहमति से पहले ही पूरी तरह निर्धारित किया जा चुका है। बचे हुए कुछ सीमित हिस्सों में जो विसंगतियां हैं, वे मुख्य रूप से सीमावर्ती नदियों द्वारा अपना प्राकृतिक मार्ग बदलने के कारण पैदा हुई हैं, जिन्हें दोनों देश आपसी संवाद के जरिए सुलझा रहे हैं। भारत ने दोटूक लहजे में कहा कि यह पूरी तरह से भारत और नेपाल का आपसी द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी भी 'तीसरे देश' के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। इसके साथ ही, नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी आरएसपी (RSP) के अध्यक्ष रबी लामिछाने के भारत आगमन पर मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच बहुआयामी ऐतिहासिक संबंध हैं और वे यहाँ कई उच्च स्तरीय बैठकों का हिस्सा बनेंगे।
कश्मीर पर पाकिस्तान-यूरोपीय संघ के साझा बयान पर भारत की तीखी आपत्ति, आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं
पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा जारी किए गए एक संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का अवांछित जिक्र किए जाने पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। विदेश मंत्रालय ने इस पर अपनी तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की टिप्पणियां भारत के संप्रभु और आंतरिक मामलों में पूरी तरह से अनावश्यक और अनुचित हस्तक्षेप हैं। मंत्रालय ने दुनिया को याद दिलाया कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न, संप्रभु और अविभाज्य हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि जिन पक्षों का इस भू-भाग और मुद्दे से कोई कानूनी या भौगोलिक सरोकार नहीं है, उन्हें इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।


