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    शिक्षा और संघर्ष की मिसाल बने प्रो. रमेश बैरवा

    सेवानिवृत्ति समारोह में संघर्ष का संकल्प, वंचित वर्गों के अधिकारों की उठाई आवाज

    अलवर। राजकीय कला महाविद्यालय अलवर में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले तथा वर्तमान में राजकीय महाविद्यालय गंगापुर सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर एवं राजकीय कन्या महाविद्यालय वजीरपुर के नोडल अधिकारी डॉ. रमेश बैरवा की सेवानिवृत्ति के अवसर पर उनके पैतृक गांव जीवली में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, विद्यार्थियों, परिजनों एवं ग्रामीणों सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लेकर उनका सम्मान किया।

    कार्यक्रम के दौरान प्रो. बैरवा को माल्यार्पण, साफा, शॉल, स्मृति चिह्न एवं महापुरुषों के चित्र भेंट कर उनके स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। साथ ही उनके जन्मदिवस पर भी बधाई दी गई। अलवर सहित विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने उनके शैक्षिक, सामाजिक एवं वैचारिक योगदान की सराहना की।

    इससे पूर्व राजकीय महाविद्यालय गंगापुर सिटी की प्राचार्य प्रो. सुमित्रा मीना के नेतृत्व में महाविद्यालय स्टाफ तथा राजकीय कन्या महाविद्यालय वजीरपुर के शिक्षक एवं छात्राओं ने भावभीनी विदाई देकर उनके दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।

    सम्मान समारोह में अतिथियों का स्वागत प्रो. बैरवा की पत्नी एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की अलवर जिला सचिव रईसा ने किया। कार्यक्रम का संचालन विज्ञान शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल सत्यप्रेमी ने किया। समारोह की अध्यक्षता गांव के पंच-पटेलों ने की तथा पारंपरिक सम्मान स्वरूप साफा पहनाकर प्रो. बैरवा का अभिनंदन किया।

    सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि प्रो. रमेश बैरवा ने अपने छात्र जीवन से ही सामाजिक न्याय, शिक्षा और संघर्ष की विचारधारा को अपनाया। उन्होंने शिक्षक हितों, विद्यार्थियों के अधिकारों तथा वंचित वर्गों की समस्याओं को लगातार उठाया। वक्ताओं ने उन्हें एक निडर शिक्षक, सामाजिक चिंतक और संघर्षशील व्यक्तित्व बताया।

    वक्ताओं ने कहा कि प्रो. बैरवा ने करीब 31 वर्षों की राजकीय सेवा के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों के अधिकारों, महाविद्यालयों में संसाधनों की उपलब्धता तथा सामाजिक समानता के मुद्दों पर लगातार आवाज बुलंद की। वे विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

    अपने धन्यवाद उद्बोधन में प्रो. रमेश बैरवा ने कहा कि वे एक मजदूर-किसान परिवार से आते हैं और जीवन में मिले सहयोग के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन से ही अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना उनका स्वभाव रहा है और सेवानिवृत्ति के बाद भी वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्थायी रोजगार तथा मजदूरों, किसानों, दलितों और वंचित वर्गों के सम्मान एवं अधिकारों के लिए संघर्ष को और मजबूत करेंगे।

    समारोह में शिक्षा, सामाजिक सेवा, प्रशासन, कानून और विभिन्न जनसंगठनों से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने प्रो. बैरवा के सामाजिक एवं शैक्षिक योगदान की सराहना करते हुए उनके आगामी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।

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