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    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शरद पवार का बड़ा दावा, बोले- ‘PM से बातचीत के बाद बदला घटनाक्रम’

    नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित अन्य मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन समाप्त हो गया है। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने इस घटनाक्रम पर एक बड़ा बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

    पीएम मोदी से मुलाकात बनी इस्तीफे की मुख्य वजह

    शरद पवार ने दावा किया कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई सीधी बातचीत ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुख्य कारण बनी। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर आंदोलनकारी छात्रों और सरकार के बीच संवाद कायम करने का अनुरोध किया था। पवार के अनुसार, उन्होंने पीएम मोदी को स्पष्ट किया था कि लोकतंत्र में बातचीत बेहद जरूरी है और इसी चर्चा के सुखद परिणामस्वरूप शिक्षा मंत्री ने पद छोड़ दिया।

    छात्र शक्ति की एकजुटता और देशव्यापी आंदोलन का असर

    शरद पवार ने इस घटनाक्रम को देश के युवाओं और छात्र शक्ति की एक ऐतिहासिक जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं ने दमनकारी नीतियों से डरे बिना अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान उन्होंने विपक्षी सांसदों और नेताओं को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने छात्रों के इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया।

    नीट परीक्षा धांधली और बढ़ता राजनीतिक दबाव

    शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पिछले कई हफ्तों से बन रहे भारी जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव का परिणाम है। नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर देशभर के छात्रों और अभिभावकों में तीव्र असंतोष था। लगातार बढ़ते विरोध और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच सरकार पर नैतिक आधार पर कदम उठाने का भारी दबाव बना हुआ था।

    सोनम वांगचुक के अनशन ने दी आंदोलन को नई दिशा

    इस पूरे आंदोलन को उस समय एक नया मोड़ मिला जब मशहूर शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में आ गए। जंतर-मंतर पर उनके 20 दिनों के लंबे अनिश्चितकालीन अनशन ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उनके बाद अन्य नेताओं के भूख हड़ताल पर बैठने से आंदोलन और तीव्र हो गया, जिसके चलते आखिरकार सरकार को मांगें मानने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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