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    कर्नाटक कांग्रेस में अंदरूनी कलह तेज: रामलिंगा के बाद एक और मंत्री ने उठाए विभागों के बंटवारे पर सवाल, सीएम शिवकुमार की बढ़ीं मुश्किलें

    बेंगलुरु | कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार सरकार के भीतर मंत्रियों के बीच महकमों के वितरण को लेकर उपजा विवाद अब गहराता जा रहा है। दिग्गज नेता रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद अब कैबिनेट मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने भी कैबिनेट विस्तार और मंत्रियों को सौंपे गए विभागों पर खुलेआम असंतोष व्यक्त किया है। मुनियप्पा का आरोप है कि आलाकमान द्वारा विभागों को बांटते समय नेताओं के राजनीतिक अनुभव और उनकी वरिष्ठता की अनदेखी की गई है। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इस फैसले की तुरंत समीक्षा करने की मांग की है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि सत्ताधारी दल के अंदरूनी हालात ठीक नहीं हैं।

    खाद्य विभाग मिलने से नाराज मुनियप्पा ने उठाए वरिष्ठता पर सवाल

    वर्तमान में खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे के.एच. मुनियप्पा असल में सामाजिक कल्याण या कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी चाहते थे। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि रामलिंगा रेड्डी और वह खुद आठ-आठ बार चुनाव जीतकर सदन पहुंचे हैं। ऐसे में पांच, छह या सात बार के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लंबे राजनीतिक सफर और अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए था। मुनियप्पा के इस आक्रामक रुख ने कांग्रेस के भीतर मची रार को सरेआम उजागर कर दिया है, जिसके बाद से पार्टी डिफेंसिव मोड में आ गई है।

    मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से हस्तक्षेप की गुहार

    अपनी मांग को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ नेता ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मामले में दखल देने की अपील की है। मुनियप्पा ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से राहुल गांधी को पहले ही अवगत करा दिया था। उनका तर्क है कि यदि उन्हें सामाजिक कल्याण विभाग मिलता, तो वे शोषित और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर पाते, वहीं कृषि या सिंचाई मंत्रालय मिलने पर उन्हें किसानों के हित में बड़े कदम उठाने का अवसर मिलता। उन्होंने नेतृत्व से सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ न्यायसंगत व्यवहार करने की बात कही है।

    आगामी विधानसभा चुनाव पर प्रतिकूल असर पड़ने की चेतावनी

    मुनियप्पा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मंत्रालयों का यह असंतुलित बंटवारा केवल वर्तमान सरकार के कामकाज को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को इसका भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पिछले 50 वर्षों से पार्टी के प्रति वफादार रहने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और नेताओं में किसी भी तरह के भ्रम को रोकने के लिए इस असंतुलन को तुरंत ठीक करना जरूरी है। हालांकि, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्थिति को संभालते हुए कहा है कि सभी मतभेदों को आपसी संवाद से सुलझा लिया जाएगा, लेकिन इस आंतरिक कलह ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है।

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