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    Homeराजनीतिखरगे-राहुल, सोनिया-ममता, अखिलेश-तेजस्वी समेत नेता जुटे इंडिया ब्लॉक में

    खरगे-राहुल, सोनिया-ममता, अखिलेश-तेजस्वी समेत नेता जुटे इंडिया ब्लॉक में

    नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'इंडिया गठबंधन' (INDIA Block) की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक शुरू हो गई है। लगभग दो साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहे इस महा-मंथन में विपक्षी कुनबे के तमाम बड़े दिग्गजों का जमावड़ा लगा है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत देश के कई कद्दावर नेता एक मंच पर मौजूद हैं। हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद विपक्षी एकजुटता को धार देने और केंद्र सरकार के खिलाफ एक साझा राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने के लिहाज से इस बैठक को बेहद निर्णायक माना जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का विपक्षी एकजुटता पर करारा प्रहार

    इस हाई-प्रोफाइल बैठक को लेकर सत्ताधारी एनडीए गठबंधन की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विपक्षी गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि यह तथाकथित गठबंधन और कुछ नहीं, बल्कि सिर्फ एक-दूसरे की राजनीतिक कमियों और नाकामियों को छिपाने का एक खोखला माध्यम बन गया है। चिराग पासवान ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर बेहद हैरानी है कि ममता बनर्जी इस बैठक में हिस्सा ले रही हैं, जबकि अभी कुछ दिनों पहले हुए पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान खुद राहुल गांधी और कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं ने उनकी पार्टी टीएमसी की जमकर आलोचना की थी। उन्होंने दावा किया कि केवल सत्ता के लालच में ये दल एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलने के बाद आज साथ बैठे हैं और जरूरत पड़ने पर ये फिर एक-दूसरे का साथ छोड़ देंगे, इसलिए इस तरह की बैठकों का जनता के बीच कोई खास महत्व नहीं रह जाता है।

    डीएमके की अनुपस्थिति और राहुल गांधी के पोस्टरों पर सीपीआई (एम-एल) का रुख

    बैठक शुरू होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए सीपीआई (एम-एल) के प्रमुख नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने इस महा-मंथन से जुड़ी कई अहम बातों पर अपनी राय रखी। बैठक में तमिलनाडु के सत्ताधारी दल डीएमके (DMK) के किसी प्रतिनिधि के शामिल न होने पर उन्होंने साफ किया कि डीएमके के नेता भले ही आज किसी कारणवश इस बैठक में शारीरिक रूप से मौजूद न हों, लेकिन वैचारिक रूप से वे पूरी तरह हमारे साथ खड़े हैं। देश की मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को अभूतपूर्व बताते हुए उन्होंने कहा कि आज तानाशाही के खिलाफ सभी को मिलकर लड़ना होगा। वहीं, दिल्ली की सड़कों पर राहुल गांधी की आलोचना करने वाले विवादित पोस्टरों के सवाल पर दीपांकर ने कहा कि जो ताकतें देश में 'इंडिया गठबंधन' को बिखरते हुए देखना चाहती हैं, यह पूरी तरह उन्हीं की साज़िश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारत को लोकतंत्र बचाने के लिए इस गठबंधन की सबसे ज्यादा जरूरत है।

    महंगाई-बेरोजगारी पर घेराव और एजेंडा तय करने की कवायद

    बैठक में शामिल होने पहुंचीं एनसीपी (एससीपी) की वरिष्ठ सांसद सुप्रिया सुले ने देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आज पूरा भारत गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जहां चारों तरफ कमरतोड़ महंगाई, रिकॉर्ड बेरोजगारी और संस्थागत भ्रष्टाचार व्याप्त है और विपक्ष को इन जनहित के मुद्दों पर संसद से सड़क तक मजबूती से आवाज उठानी होगी। वहीं, क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (आरएसपी) के सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचते ही स्पष्ट किया कि सभी विपक्षी दलों को एक साझा और मजबूत मंच प्रदान करने के लिए आज सभी ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी साझा किया कि बैठक से पहले कोई एक निश्चित एजेंडा तय नहीं किया गया है, बल्कि सभी नेताओं के सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

    कांग्रेस के रवैये पर सहयोगी दलों की नाराजगी और नसीहत

    इस महा-बैठक के बीच विपक्षी खेमे के भीतर की अंदरूनी खींचतान और नाराजगी भी खुलकर सामने आई है। सीपीआई के वरिष्ठ सांसद पी. संदोष कुमार ने इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कांग्रेस पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने खुले तौर पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन निश्चित रूप से भाजपा के खिलाफ एक बहुत बड़ा और व्यापक मोर्चा है, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस इसे ठीक से संभाल नहीं पा रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि केरल के पिछले चुनावों में कांग्रेस ने पूरी तरह निराधार आरोप लगाया कि वामपंथी दल भाजपा के साथ गुप्त गठबंधन में हैं, जिससे जमीन पर गलत संदेश गया। यही नहीं, पुडुचेरी में भी अंतिम समय पर कांग्रेस ने खुद ही गठबंधन तोड़ दिया था। संदोष कुमार ने नसीहत देते हुए कहा कि यदि इस गठबंधन को लंबे समय तक जारी रखना है, तो कांग्रेस को बड़प्पन दिखाते हुए अधिक जिम्मेदारी से पहल करनी होगी और जमीनी राजनीतिक वास्तविकता को समझना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे इस महत्वपूर्ण मुद्दे को बैठक के भीतर शीर्ष नेतृत्व के सामने मजबूती से उठाएंगे।

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