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    CGWA नियमों पर विवाद के बीच मुंबई में जल आपूर्ति पर संकट के बादल

    मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आने वाले दिनों में पानी की किल्लत का संकट और ज्यादा विकराल रूप धारण कर सकता है। एक तरफ जहां मुख्य बांधों और झीलों में जलस्तर लगातार नीचे जाने के कारण मुंबईकर पहले से ही पानी की कटौती से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आज से पानी के टैंकर ऑपरेटरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी (CGWA) द्वारा लागू किए गए नए नियमों के विरोध में टैंकर मालिकों और संचालकों ने यह सख्त कदम उठाया है। उनका दावा है कि इन कड़े नियमों के चलते उनका पूरा व्यवसाय ठप होने की कगार पर पहुंच गया है, जिसके कारण मुंबई वॉटर टैंकर एसोसिएशन (MWTA) ने 7 जून 2026 की रात 12 बजे से अगले आदेश तक पूरे महानगर में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है।

    सख्त नियमों के विरोध में एसोसिएशन ने लिया बड़ा फैसला

    एसोसिएशन (MWTA) का आरोप है कि प्रशासन द्वारा शहर में सीजीडब्ल्यूए (CGWA) के नियमों को बेहद सख्त और चुनिंदा तरीके से थोपा जा रहा है, जिसके तहत कुआं संचालकों और जलापूर्ति करने वालों को लगातार दंडात्मक नोटिस भेजे जा रहे हैं। संस्था ने अपनी सूचना में स्पष्ट किया कि वॉटर टैंकर उद्योग पिछले 80 से अधिक वर्षों से मुंबई के लाखों नागरिकों, रिहायशी सोसायटियों, अस्पतालों और उद्योगों को आपातकालीन सेवाएं दे रहा है, लेकिन मौजूदा दमनकारी नीतियों के कारण अब काम करना पूरी तरह असंभव हो गया है। एसोसिएशन ने जनता को होने वाली इस भारी असुविधा पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि वे इस गंभीर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और कोई व्यावहारिक समाधान निकालें, अन्यथा हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी।

    अस्पतालों, झुग्गी बस्तियों और निर्माण कार्यों पर पड़ेगा सीधा असर

    इस अनिश्चितकालीन चक्काजाम का सबसे घातक असर मुंबई में चल रही बड़ी बुनियादी ढांचा और इमारत निर्माण परियोजनाओं, पानी की कमी से जूझ रही झुग्गी बस्तियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ना तय माना जा रहा है। इसके अलावा, रोजाना टैंकरों के भरोसे चलने वाले कई निजी और सरकारी संस्थानों में भी हाहाकार मचने की आशंका है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के जलापूर्ति विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी चिंता जताते हुए स्वीकार किया है कि यदि यह हड़ताल लंबी खिंचती है, तो बीएमसी के बड़े अस्पतालों, आपातकालीन नागरिक सेवाओं और अन्य आवश्यक सरकारी व्यवस्थाओं की रीढ़ पूरी तरह टूट सकती है।

    विपक्ष हमलावर और आदित्य ठाकरे ने बीजेपी को घेरा

    टैंकरों के पहिए थमने के बाद मुंबई का यह जल संकट अब पूरी तरह से सियासी रंग ले चुका है और विपक्षी दल इस मुद्दे पर मौजूदा महायुति सरकार को घेरने में जुट गए हैं। शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता आदित्य ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बीएमसी द्वारा कागजों पर भले ही 10% पानी कटौती की बात कही जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत में कई इलाकों में यह किल्लत इससे कहीं गुना ज्यादा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि भाजपा ने साल 2022 में महाविकास अघाड़ी सरकार के 'डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट' (समुद्री पानी को मीठा बनाने की योजना) को दुर्भावना के तहत रद्द न किया होता, तो वह प्रोजेक्ट 2025 तक शुरू हो जाता और आज मुंबई को यह दिन नहीं देखना पड़ता। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से नियमों में तुरंत ढील देने की मांग की है।

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