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    राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, विधायकों को तेलंगाना भेजने की अटकलें

    रांची। झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अचानक बेहद गर्म हो गया है। राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, सत्तारूढ़ महागठबंधन अपने सभी विधायकों की संभावित टूट और पाला बदलने से रोकने के लिए उन्हें तेलंगाना भेजने की तैयारी में है। रणनीति के अनुसार, इन विधायकों को मतदान से ठीक एक दिन पहले ही वापस रांची लाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज्य में आगामी 18 अगस्त को राज्यसभा की दो सीटों के लिए वोट डाले जाने हैं। इस चुनावी समर में महागठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। शुरुआत में यह मुकाबला बेहद सीधा लग रहा था, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के अचानक चुनावी मैदान में उतरने से पूरी बाजी पलट गई है और मुकाबला त्रिकोणीय व बेहद दिलचस्प हो चला है। सूत्रों का कहना है कि नाथवानी को विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का परोक्ष रूप से पूरा समर्थन हासिल है।

    जीत के लिए 28 वोटों का गणित और एनडीए की घेराबंदी

    झारखंड विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट पर फतह हासिल करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को न्यूनतम 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के मतों की आवश्यकता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो सत्ताधारी महागठबंधन के पाले में इस समय कुल 56 विधायक मौजूद हैं, जो अंकगणित के लिहाज से दोनों सीटों पर आसानी से जीत दर्ज करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त हैं। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी खेमे एनडीए के पास अपने कुल 24 विधायक हैं, जो अकेले दम पर एक भी सीट जिताने की स्थिति में नहीं हैं। इसी कमजोरी को दूर करने और सत्तापक्ष में सेंध लगाने के लिए निर्दलीय चेहरे को आगे कर एनडीए ने अपनी मजबूत घेराबंदी शुरू कर दी है, जिससे चुनाव का रोमांच चरम पर पहुंच गया है।

    परिमल नाथवानी की एंट्री से बढ़ी कांग्रेस की धड़कनें

    निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर परिमल नाथवानी के नामांकन दाखिल करने के बाद से सबसे ज्यादा बेचैनी कांग्रेस खेमे में देखी जा रही है। सत्तापक्ष को डर है कि नाथवानी के प्रभाव और एनडीए के रणनीतिक कौशल के कारण उनके कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं। इस संभावित क्रॉस वोटिंग (भीतरघात) के खतरे को भांपते हुए ही शीर्ष नेतृत्व ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर सुरक्षित स्थान पर भेजने का फैसला किया है, ताकि मतदान के दिन तक पूरे कुनबे को एक सूत्र में बांधकर रखा जा सके।

    विधायकों को एकजुट रखने के लिए रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का सहारा

    चुनाव की तारीख नजदीक आते ही दोनों ही खेमों में शह-मात का खेल तेज हो गया है। महागठबंधन जहां अपने 56 विधायकों की एकजुटता का दावा कर रहा है, वहीं पर्दे के पीछे 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' का सहारा लेकर खुद को सुरक्षित करने में जुटा है। एनडीए के रणनीतिकार भी निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में आवश्यक अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करने के लिए छोटे दलों और असंतुष्ट विधायकों से संपर्क साध रहे हैं। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि 18 अगस्त को होने वाले इस कड़े मुकाबले में महागठबंधन अपनी दोनों सीटें बचाने में कामयाब रहता है या परिमल नाथवानी कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होते हैं।

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