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    फ्लाईओवर निरस्त होने से भरतपुरवासियों में आक्रोश, एलिवेटेड रोड परियोजना की उठी मांग

    मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील, लुधावई से ऊँचा नगला तक एलिवेटेड रोड स्वीकृत कराने का आग्रह

    भरतपुर। आगरा–भरतपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित सेवर तिराहा, सारस चौराहा एवं शीशम तिराहा फ्लाईओवर परियोजनाओं को निरस्त किए जाने के बाद भरतपुर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। लंबे समय से इन व्यस्त और दुर्घटना संभावित चौराहों पर यातायात समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को इस निर्णय से बड़ा झटका लगा है।

    समृद्ध भारत अभियान ने मुख्यमंत्री से लुधावई-ऊँचा नगला एलिवेटेड रोड स्वीकृत कराने की मांग की
    समृद्ध भारत अभियान ने मुख्यमंत्री से लुधावई-ऊँचा नगला एलिवेटेड रोड स्वीकृत कराने की मांग की

    इस संबंध में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि राज्य सरकार सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष भरतपुर की जनता की भावनाओं को प्रभावी ढंग से रखे तथा निरस्त फ्लाईओवर परियोजनाओं के स्थान पर लुधावई से ऊँचा नगला तक समग्र एलिवेटेड रोड परियोजना को स्वीकृति दिलाने का प्रयास करे।

    बढ़ता यातायात बना बड़ी चुनौती

    पत्र में उल्लेख किया गया है कि आगरा–भरतपुर राष्ट्रीय राजमार्ग राजस्थान और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में मालवाहक वाहन, बसें, निजी वाहन और अन्य यातायात इस मार्ग से गुजरते हैं। पिछले कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि होने के कारण सेवर तिराहा, सारस चौराहा और शीशम तिराहा जैसे प्रमुख जंक्शनों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि इन चौराहों पर आए दिन लंबा जाम लग जाता है, जिससे आमजन, व्यापारी, विद्यार्थी और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से सेवर तिराहा और शीशम तिराहा दुर्घटनाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं, जहां अक्सर सड़क हादसे होते रहते हैं।

    परियोजना निरस्त होने से टूटी उम्मीदें

    सीताराम गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना की निविदा प्रक्रिया तक पूरी हो चुकी थी और स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही यातायात समस्याओं से राहत मिलेगी। लेकिन परियोजना निरस्त होने से नागरिकों की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचा है।

    उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान स्थिति में कोई दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले वर्षों में यातायात व्यवस्था और अधिक जटिल हो जाएगी तथा दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ेगा।

    एलिवेटेड रोड को बताया बेहतर विकल्प

    पत्र में सुझाव दिया गया है कि अलग-अलग फ्लाईओवरों के निर्माण की बजाय लुधावई से ऊँचा नगला तक एलिवेटेड रोड का निर्माण अधिक प्रभावी और दूरदर्शी समाधान साबित हो सकता है। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा और शहर के भीतर बढ़ते ट्रैफिक दबाव में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

    गुप्ता ने कहा कि एलिवेटेड रोड बनने से न केवल वर्तमान जाम और दुर्घटनाओं की समस्या का समाधान होगा, बल्कि अगले 20 से 25 वर्षों तक बढ़ते यातायात भार से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से भी राहत मिलेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी, प्रदूषण में कमी आएगी तथा क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।

    जनहित में शीघ्र निर्णय की मांग

    समृद्ध भारत अभियान की ओर से मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि भरतपुर के तेजी से हो रहे शहरी विस्तार, बढ़ते यातायात दबाव और जनहित को ध्यान में रखते हुए एलिवेटेड रोड परियोजना को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही केंद्र सरकार एवं सड़क परिवहन मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर इसकी शीघ्र स्वीकृति और वित्तीय प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं।

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