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    श्रमण संस्कृति सम्मान समारोह में मेधावी विद्यार्थी सम्मानित, संस्कार शिक्षा से निखरी प्रतिभाएं

    श्रमण संस्कृति शिविर में 7 विद्यार्थियों ने बनाई मेरिट, शिक्षिकाओं और संयोजकों का भी हुआ सम्मान

    कठूमर। श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कठूमर में आयोजित 11 दिवसीय ‘श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर-2026’ का भव्य समापन प्रतिभा सम्मान समारोह के साथ सम्पन्न हुआ। समारोह में जूनियर और सीनियर वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों के साथ शिविर को सफल बनाने वाली संयोजिका, सहसंयोजिका एवं शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया।

    युगदृष्टा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से आयोजित इस शिविर में बच्चों को धर्म, संस्कार, नैतिक मूल्य, अहिंसा, संयम और त्याग की शिक्षा दी गई। शिविर के अंतिम दिन आयोजित परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को साफा, दुपट्टा, माला एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

    श्रमण संस्कृति परीक्षा में इन विद्यार्थियों ने बनाई मेरिट

    जूनियर वर्ग (5 वर्ष तक) में

    • तनिष्का शर्मा
    • रौनक जैन
    • साध्य जैन

    ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया।

    सीनियर वर्ग (13 वर्ष तक) में

    • मेधावी जैन
    • मात्रिका जैन
    • पंथ जैन
    • अंश जैन

    ने सर्वोच्च स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

    शिक्षिकाओं और संयोजकों का हुआ सम्मान

    शिविर के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संयोजिका नेहा जैन, सहसंयोजिका वर्षा जैन, विधुषी जैन, विधी जैन एवं आतिश्य लकी जैन को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अलावा शिविर में भाग लेने वाले सभी बच्चों को भी प्रतीक चिन्ह एवं मालाएं पहनाकर प्रोत्साहित किया गया।

    श्रमण संस्कृति से जोड़ने का रहा उद्देश्य

    समारोह में सकल जैन समाज एवं महिला मंडल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर अध्यक्ष मुकेश जैन, विजयपाल जैन, अशोक जैन (पत्रकार), शीतल जैन, महिला मंडल अध्यक्ष इंद्रा जैन, नेहा जैन, पूनम जैन, रजनी जैन, मंजू जैन, मालती जैन, जूली जैन, लता जैन, रिंकी जैन, अर्चना जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं शिविरार्थी मौजूद रहे।

    आयोजकों ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को श्रमण संस्कृति, जैन धर्म और नैतिक मूल्यों से जोड़ना था। शिविर के दौरान बच्चों में आए सकारात्मक बदलाव और धर्म के प्रति बढ़ी रुचि से अभिभावकों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की।

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