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    कोर्ट परिसर में पादरी को थप्पड़ मारने के विरोध में सौंपा ज्ञापन, FIR और सुरक्षा की मांग

    पादरी मामले में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच व दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उठाई मांग

    अलवर। न्यायालय परिसर के बाहर पुलिस सुरक्षा के बीच पादरी राजकुमार के साथ हुई कथित मारपीट और थप्पड़ की घटना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंगलवार को पादरी राजकुमार के समर्थन में सामाजिक एवं मानवाधिकार संगठनों से जुड़े लोगों ने मिनी सचिवालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

    ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि दिल्ली निवासी पादरी राजकुमार धोबी और उनकी पत्नी बाला के साथ पहले लाल डिग्गी क्षेत्र में भीड़ द्वारा कथित रूप से अभद्रता, मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। इसके बाद जब पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें न्यायालय में पेशी के लिए लाया गया, तब पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा द्वारा कथित रूप से पुलिस घेरे को तोड़कर पादरी को थप्पड़ मारने की घटना सामने आई।

    कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल

    ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि यह घटना कानून के शासन, न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसर जैसे संवेदनशील स्थान पर इस प्रकार की घटना होना चिंताजनक है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    FIR दर्ज करने की मांग

    ज्ञापन में मांग की गई कि पादरी राजकुमार और उनकी पत्नी के साथ कथित मारपीट एवं दुर्व्यवहार में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा का नाम भी शामिल करते हुए उनके खिलाफ भी विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की गई।

    सुरक्षा व्यवस्था की जांच की मांग

    ज्ञापन सौंपने वालों ने कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था में हुई कथित चूक की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि पुलिस सुरक्षा के बावजूद इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

    पादरी और परिवार को सुरक्षा देने की मांग

    ज्ञापन में कहा गया कि घटना के बाद पादरी राजकुमार और उनके परिवार में भय का माहौल है। इसलिए उन्हें पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए ताकि वे बिना किसी डर के अपना जीवनयापन कर सकें।

    ज्ञापनकर्ताओं ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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